कल्प कथा: साहित्य का एक अनुपम, आध्यात्मिक और सम्मानपूर्ण मंच -जे. पी. शर्मा

साहित्यिक जगत में कई मंच आते हैं और चले जाते हैं, पर कुछ ऐसे मंच होते हैं जो अपनी गरिमा, उद्देश्य और कार्यशैली के कारण साहित्यप्रेमियों के हृदय में स्थायी स्थान बना लेते हैं। कल्प कथा ऐसा ही एक दिव्य और विशिष्ट मंच है, जो न केवल साहित्य की सेवा कर रहा है, बल्कि भक्ति, संस्कृति और सम्मान की परंपरा को भी आगे बढ़ा रहा है। कल्प कथा मात्र एक मंच नहीं, यह एक कल्पवृक्ष की तरह है, जहाँ साहित्य की शाखाओं पर रचनाकारों की सृजनधर्मी प्रतिभाएं फूलती-फलती हैं। यहाँ हर शब्द, हर भाव, हर अभिव्यक्ति मानो जीवन को एक नई दिशा देती है। इस मंच की नींव रखने वाले पवनेंश जी मिश्रा एवं राधा श्री शर्मा जी साहित्य के ऐसे साधक हैं, जिन्होंने न केवल मंच की रचना की, बल्कि इसे संस्कार, स्नेह और सम्मान से सींचा। इनकी सोच में सेवा है, शैली में संस्कार और दृष्टि में नवचेतना। कल्प कथा मंच की विशेषता यह भी है कि इसकी प्रत्येक गतिविधि, प्रत्येक आयोजन में भगवान गोपीनाथ की कृपा अनुभूत होती है। मंच की ऊर्जा, उसका सकारात्मक वातावरण, रचनाकारों के चेहरे की मुस्कान और श्रोताओं की भावनाएं सभी इस ईश्वरीय छाया का प्रमाण है।समय-समय पर मंच द्वारा आयोजित ऑनलाइन काव्यगोष्ठियाँ इस मंच की विशेष पहचान हैं। इन आयोजनों में देश के कोने-कोने से उभरते और प्रतिष्ठित कलमकार शामिल होते हैं, जो अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। हर गोष्ठी, एक उत्सव की तरह होती है जहाँ शब्द झरते हैं, भाव बहते हैं और मन अभिभूत हो जाता है।
कल्प कथा मंच की आत्मा उसका सम्मान का भाव है। यहाँ हर आगंतुक का स्वागत आत्मीयता से होता है, हर रचनाकार की सृजनशीलता को सराहा जाता है, और वरिष्ठों के साथ-साथ नवोदित कवियों को भी उचित मंच और प्रोत्साहन दिया जाता है। यह मंच न केवल साहित्य को बढ़ावा देता है, बल्कि संस्कृति, भक्ति, पर्यावरण और समाजहित से जुड़ी अनेक भावनाओं को भी अपनी रचनाओं में स्थान देता है। यही कारण है कि कल्प कथा केवल एक मंच नहीं, एक सांस्कृतिक आंदोलन बन चुका है। कल्प कथा साहित्यिक, आध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों से ओतप्रोत एक ऐसा मंच है, जो रचनात्मकता के आकाश में नित्य नए सूर्य उगाता है। इस मंच के प्रति केवल आभार व्यक्त करना पर्याप्त नहीं, इसे बार-बार नमन करना साहित्यप्रेमियों का कर्तव्य है। कल्प कथा को कोटिशः वंदन साहित्य की इस अनुपम साधना को सादर प्रणाम।




