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दिल्ली में ‘श्रुतिकीर्ति शतक’ का भव्य लोकार्पण, साहित्यकारों का सशक्त समागम

 

दिल्ली विकास मिश्र। नज़र इंडिया 24

नई दिल्ली,साहित्य की अग्रणी संस्था शब्द सृजन संस्थान (पंजीकृत) के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध साहित्यकार पंडित जयराम शर्मा दिव्य द्वारा रचित खंडकाव्य ‘श्रुतिकीर्ति शतक’ का लोकार्पण समारोह दिनांक 14 दिसंबर 2025 को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के गीतांजलि सभागार, श्यामा प्रसाद मुखर्जी मार्ग, दिल्ली में गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह खंडकाव्य प्रभु श्रीराम के अनुज शत्रुघ्न की पत्नी श्रुतिकीर्ति के त्याग, निष्ठा और मौन साधना को केंद्र में रखकर रचित एक महत्त्वपूर्ण साहित्यिक कृति है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंदी अकादमी के पूर्व उपसचिव ऋषि कुमार शर्मा रहे,जबकि समारोह की अध्यक्षता दिल्ली की वरिष्ठ साहित्यकारा डॉ सविता चड्ढा ने की। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ऋषि कुमार शर्मा ने कहा कि ‘श्रुतिकीर्ति शतक’ जैसे काव्य आज के समय में उपेक्षित नारी पात्रों को साहित्य के केंद्र में लाने का सशक्त प्रयास है। अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ सविता चड्ढा ने कृति को भारतीय सांस्कृतिक चेतना और स्त्री-चरित्र की गरिमा का संवेदनशील दस्तावेज बताया।इस अवसर पर दिल्ली-एनसीआर के अनेक वरिष्ठ साहित्यकारों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिनमें डॉ जयसिंह आर्य, डॉ अशोक मधुप, बाबा कानपुरी, शिवकुमार बिलगरामी, डॉ सुनीता शर्मा, आकाशवाणी दिल्ली के सहायक निदेशक राम अवतार बैरवा, डॉ सुशील द्विवेदी,अनिल मीत, डॉ सत्यम भास्कर विकास मिश्रा सहित 70 से अधिक साहित्यकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रेरणा सिंह ने किया l।कार्यक्रम का संचालन शब्द सृजन संस्थान के अध्यक्ष डॉ राजीव कुमार पांडेय ने प्रभावशाली ढंग से किया। डॉ ओंकार त्रिपाठी ने लेखक पंडित जयराम शर्मा दिव्य के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके साहित्यिक अवदान को रेखांकित किया। पुस्तक की समीक्षा श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ सुशील द्विवेदी द्वारा की गई, जिसमें काव्य की शिल्पगत सुदृढ़ता, भावप्रवणता और कथ्य की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की गई।समारोह का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं वंदे मातरम् से हुआ तथा कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रभाव से ओतप्रोत वातावरण में सम्पन्न हुआ। संपूर्ण आयोजन साहित्यिक गरिमा, वैचारिक गंभीरता और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त उदाहरण सिद्ध हुआ।

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