मेरे संस्मरण — माला कककड

आज वो खड़ी थी, बिल्कुल आईने के सामने अपने आप को निहार रही थी।
नाजों से पली हुई सुंदर सी -प्यारी सी मासूम सी वो पढ़ रही थी ,किताबों में जाकर खो जाती थी ।इस तरह से उसे आगे भी पढ़ना था ।पर समय का चक्र जो बीता माता-पिता ने अच्छे से परिवार को देखकर उसकी शादी करा दी ।वो समय ही ऐसा था ,वो दौर ही ऐसा था कि लड़कियों की बहुत उम्र तब नहीं होती थी सो उसने भी अपने मन को मनाकर माता-पिता के कहने पर अच्छे से परिवार में शादी कर ली ।यूँ तो शादी ना करने की कोई वजह नहीं थी पर उसके मन में अभी पढ़ने की इच्छा थी पढ़-लिखकर उसे किसी कॉलेज में या तो प्रोफेसर बनना था या तो accounts के field में उसे कहीं आगे जाना था पर समय के आगे उसने अपनी मन की बात छुपा ली।
अपने घर परिवार में वो मासूम सी कली कहीं खो गई। खो नहीं गई, मानो कि पिरो गई। उसने अपने घर को अपना बना लिया था, घर परिवार के लोगों को अपना बनाने में जुट गई थी। पर कहीं ना कहीं उसके मन में वो एक इच्छा अभी भी जीवित थी। समय रहते उसे बेटा हुआ, बेटा दो-तीन साल का हो गया। इन सारी बातों में भी उसके मन में एक बात तो खटक ही रही थी कि काश !मुझे पढ़ने का मौका मिला, मिला होता तो मैं कुछ और अच्छा ,मुझे जो चाहिए था वो कर पाती। जिसे हम आज के जमाने में कैरियर कहते हैं, प्रोफेशन कहते हैं, उस टाइप की उसकी इच्छा थी।
पर ,उसी वक्त मानो एक बात हुई।
वो पढ़ने की बहुत शौकीन थी, तो उसने एक गृह शोभा अपने घर पे मंगाया था। उस गृह शोभा को एक दिन उसने खोला, जिसमें एक लघु वार्ता थी। उस लघु वार्ता का जो मर्म था, जो भाव था, वो ये था कि किसी भी प्रोफेशन या किसी भी कैरियर से बढ़कर होता है माँ बनना। माँ का प्यार बच्चों के लिए कितना जरूरी होता है, बच्चों के जीवन के लिए माँ सबसे बड़ी किस्मत होती है, सबसे बड़ी अहमियत होती है। बस ,एक ही लघु कथा को पढ़कर उसने अपने मन का रुख बदल दिया, अपने मन की वो इच्छा को उसने दबा लिया, अपने मन को समझा लिया और तब से बड़े प्यार से ,बड़ी ही मेहनत से ,लगन से वो अपने बच्चों की परवरिश में जुट गई।
और आज जब बच्चे बड़े हो गए, काबिल बन गए, अपनी माँ की परवरिश से भी ज्यादा समाज में ,अपने अभ्यास में और अपने बिजनेस में आगे बढ़ गए, तब वो आईने में देखती है, अपने आप को प्यार से निहारती है और खुश होती है कि हाँ !मैंने अपने बच्चों की काफी सारी ,काफी अच्छी परवरिश की।बस ,आज उसको अपनी परवरिश का अभिमान है।
यह एक मा का अभिमान है कि उसके बच्चे क़ाबिल बने, देशके अच्छे, सच्चे नागरिक बने।
माला कककड
मोरबी
गुजरात




