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विश्वकर्मा पूजा: श्रम, सृजन और संस्कार का उत्सव – दीपक शर्मा

 

जयपुर, 17 सितम्बर। आज पूरे देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ विश्वकर्मा पूजा दिवस मनाया गया। भगवान विश्वकर्मा को देव शिल्पी और तकनीकी विज्ञान का आदि प्रवर्तक माना जाता है। इसी दिन को श्रम, रचनात्मकता और तकनीकी विकास के प्रतीक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। जांगिड़ ब्राह्मण समाज से जुड़े एडवोकेट दीपक शर्मा ने बताया कि भगवान विश्वकर्मा हमारे कर्म, कौशल और कला के प्रतीक हैं। हमारे पूर्वजों ने लकड़ी, धातु, शिल्प और वास्तुकला में अमूल्य योगदान दिया है, जो भारत की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। भगवान विश्वकर्मा द्वारा स्वर्ग निर्माण, इंद्र का पुष्पक विमान, द्वारका नगरी और मायासभा जैसी अद्भुत रचनाएँ की गईं। यह संदेश देती हैं कि कर्म में ईमानदारी और कला में निष्ठा हो तो असंभव भी संभव हो सकता है। दीपक शर्मा ने कहा कि आज के युग में तकनीक और शिक्षा का मेल ही सच्ची विश्वकर्मा पूजा है। चाहे कोई इंजीनियर, कलाकार, डिज़ाइनर, शिक्षक, न्यायिक अधिकारी या वैज्ञानिक हो हर क्षेत्र में विश्वकर्मा जी की प्रेरणा विद्यमान है। उन्होंने श्रम के महत्व पर बल देते हुए कहा कि किसी भी श्रम को छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए। बढ़ई, लोहार, इंजीनियर और आर्किटेक्ट सभी राष्ट्र निर्माण में समान रूप से योगदान देते हैं। अंत में उन्होंने आह्वान किया कि सभी को अपने जीवन में सृजनात्मकता, मेहनत और नैतिक मूल्यों को अपनाना चाहिए, ताकि एक ऐसा भारत बनाया जा सके जहाँ तकनीक और संस्कृति साथ-साथ प्रगति करें।

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