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पछतावा  — अलका गर्ग

 

अरे इतनी रात में किसका फ़ोन है ..झुँझलाते हुए अमित ने फ़ोन उठाया और तुरंत ही वापस रख दिया।
छवि ने पुछा-किसका फ़ोन है रख क्यूँ दिया ?
अमित-अरे वही विकास का..आधी रात तक उसकी मस्ती ख़त्म नहीं होती।सबको फ़ोन करके परेशान करता रहता है।समझना चाहिए न कि सामने वाले का बात करने का मन है कि नही।
तभी फ़ोन फिर से बजने लगा।अमित ने फिर काट दिया और साइलेंट पर कर दिया।बार बार लाइट चमक रही थी तो उसने फ़ोन बंद ही कर दिया और निश्चित हो कर सो गया।सोचा कल झगड़ा करेगा उस सनकी से कि बार बार फ़ोन करके परेशान क्यूँ करता है।
छवि ने कहा भी कि एक बार सुन लीजिए शायद कोई ज़रूरी काम हो पर अमित बोला -कुछ नहीं होगा बस कोई प्रोग्राम बनाएगा कल रविवार की छुट्टी के लिए..सुबह बात कर लूँगा अभी नींद ख़राब होगी सो जाओ।
दोनों अगले दिन रविवार के कारण देर से सो कर उठे।चाय पी कर अख़बार उठाया तो लोकल समाचार में ख़बर छपी थी कि उसी की गली में उसके घर के पास ही दो तीन लोगों ने किसी को चाकू मार कर हत्या कर दी।वे लोग उसका स्कूटर और घड़ी फ़ोन चेन ले कर भाग गए।
हल्की बारिश और सर्दी की रात के कारण सभी के खिड़की दरवाज़े बंद थे शायद इसलिए किसी ने चिल्लाने की आवाज़ नही सुनी।मरने वाले का नाम और खून से लथपथ फ़ोटो देख कर अमित और छवि के होश उड़ गए।वह विकास ही था।अमित ने दौड़ कर फ़ोन चालू किया तो विकास के कम से कम पंद्रह मिस कॉल थे..
और अंत में एक संदेश भी—कुछ लोगों ने तेरी गली में घेर लिया है तेरी मदद चाहिए यार…
बस उसके बाद और कुछ नही ..!
यानि कि विकास चाकू की मार खाते हुए भी विश्वास के साथ दोस्त को फ़ोन पर फ़ोन करता रहा कि वह ज़रूर आएगा।
अमित और छवि का रो रो कर बुरा हाल था।दोनों सकते में थे समझ नही पा रहे थे अब क्या करें ये उनसे क्या हो गया।फ़ोन सुन लेते तो आज उनका इतना प्यारा मस्तमौला हँसमुख दोस्त ज़िंदा होता।दो चार लोगों की मदद ले कर हल्ला बोलने पर ज़रूर गुंडे भाग जाते।
अब उनके पास पश्चाताप के अलावा और कोई रास्ता नहीं था।एक ऐसा पश्चाताप जो उन्हें सारी ज़िंदगी अपनी आग में जलाता रहेगा कि काश उन्होंने उस दिन दोस्त का फ़ोन उठा लिया होता।
कृपया कभी फ़ोन बंद मत कीजिए।फ़ोन है तो ज़रूरी बात करने के लिए ही न..ना जाने कब हम बहुत ज़रूरी बात मिस कर जायें और ज़िंदगी भर पछताना पड़े।

अलका गर्ग, गुरुग्राम

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