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काश दीपक मन को भी उजियारा कर देता — सुनिता त्रिपाठीअजय,

 

दीपक जलते हैं, रोशनी फैलाते हैं, और अंधकार को दूर करते हैं। लेकिन क्या वे मन को भी उजियारा कर सकते हैं? काश ऐसा हो पाता! मन की गहराइयों में अक्सर अंधकार छाया रहता है – नकारात्मक विचारों की, डर की, और अनिश्चितता की। दीपक की लौ जैसे बाहरी दुनिया को रोशन करती है, वैसे ही क्या हमारा मन भी रोशन हो सकता है?

जीवन में कई बार हम अंधकार में खो जाते हैं, और हमें लगता है कि अब आगे का रास्ता नहीं सूझ रहा। ऐसे में दीपक की तरह कोई हमें सही रास्ता दिखाने वाला चाहिए। काश दीपक मन को भी उजियारा कर देता, तो शायद हम अपने जीवन को और भी बेहतर बना पाते। हमारे मन में सकारात्मकता की किरणें फैलतीं, और हम जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो जाते।

लेकिन क्या सचमुच दीपक मन को उजियारा कर सकता है? शायद नहीं। मन को उजियारा करने का काम हमारे अपने हाथ में है। हमें अपने मन को सकारात्मक विचारों से भरना होगा, आत्म-विश्वास को बढ़ाना होगा, और मन के अंदर की मलिनता को दूर करना होगा।

काश दीपक मन को भी उजियारा कर देता, लेकिन सच तो यह है कि यह काम हमारे अपने हाथ में है। और अगर दीपक दूसरों के मन को भी उजियारा कर देता, जो मलिन है, तो शायद वे भी सही रास्ते पर आ जाते। लेकिन यह काम भी हमारे अपने हाथ में है। हम अपने सकारात्मक विचारों और कार्यों से दूसरों के मन को भी रोशन कर सकते हैं।

आइए, हम अपने मन को और दूसरों के मन को भी उजियारा करने का प्रयास करें। अपने अंदर की रोशनी को जगाएं, और जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देखें।

सुनिता त्रिपाठीअजय, जयपुर, राजस्थान*

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