Uncategorized

श्री राम से पहले भी क्या दीपावली मनाई जाती थी —- उर्मिला पाण्डेय उर्मि

अधिक तर लोगों को यही पता है कि दीपावली राम के वनवास से लौटने पर मनाई गई।यह बिल्कुल ग़लत है न राम दीपावली पर आए और न रावण दशहरा को मारा गया। यदि राम ने दशहरा को रावण को मारा होता तो राम एकादशी को ही वापस आ जाते क्योंकि भगवान राम रावण को मारकर तुरंत पुष्पक विमान से अयोध्या आए थे कि कहीं देर न हो जाए नहीं तो भरत जीवित नहीं मिलेंगे राम को जिस दिन वनवास हुआ था उस दिन से केवल १४,बर्ष ही रावण की उम्र बची थी जिस दिन रावण को मारा उसी दिन चौदह वर्ष हो चुके थे और भरत ने चित्रकूट में श्री राम से कहा था भैया यदि आप नहीं लौट रहे हैं पिता का वचन पूरा करने के लिए लेकिन केवल चौदह वर्ष के बाद एक दिन से अधिक समय लगा तो भरत आपको जीवित नहीं मिलेगा और दशहरा और दीपावली में बीस दिन का अंतर है इतने दिन राम कैसे देर कर सकते थे वह तो रावण को मारकर तुरंत भरत के कारण अयोध्या लौटे भारद्वाज के आश्रम में जाकर हनुमान जी को भरत के पास संदेश देने के लिए भेजा।
दशहरा को अयोध्या में राम विजय उत्सव मनाया गया जिसे विजय दशहरा कहने लगे। लेकिन रावण दशहरा को नहीं मारा गया तुलसीदास जी ने लिखा है चैत्र कृष्ण चतुर्दशी आई।रावण बध कीन्हां रघुराई।।
भगवान राम दीपावली पर अयोध्या वापस नहीं आए राम चैत्र मास चतुर्दशी को वनवास मिला था उसी रावण का वध किया अमावस्या को विभीषण का राजतिलक हुआ और चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को भरत को संदेश दिया हनुमान जी ने राम द्वितीया को लौटकर आए और पंचमी को राम का राज्याभिषेक हुआ।
बात यहीं खत्म हो जाती है दीपावली की पूजा दशरथ जी ने भी की थी।
दीपावली क्यों मनाईं जाती है देखिए असली कारण मैं भी यही समझती थी कि राम अयोध्या वापस आये थे जब मैंने श्रीमद् देवी भागवत महापुराण पढ़ा तो सत्य का पता चला कि दीपावली क्यों मनाई जाती है।एक वार दुर्वासा ऋषि भगवान शिव से भागवत कथा सुनकर जा रहे थे रास्ते में इंद्र देवता मिले इंद्र ने साष्टांग दंडवत प्रणाम किया दुर्वासा ने भगवान शिव के द्वारा दी हुई पारिजात पुष्प की माला इंद्र के गले में डाल दी इंद्र ने एरावत हाथी के मस्तिष्क पर और हाथी ने उसे सूंड से उठाकर पैरों से कुचल दिया यह देखकर दुर्वासा को इंद्र देव पर बहुत क्रोध आया और शाप दे दिया कि स्वर्ग में जो चौदह रत्न हैं वह समुद्र में समा जाएंगे जिनके ऊपर तुम्हें अहंकार हो गया है चौदह रत्नों में माता लक्ष्मी, अमृत, कामधेनु, धन्वंतरि, एरावत हाथी,बाजश्रवाघोड़ा, अप्सरा,शंख, पारिजात वृक्ष, सुदर्शन चक्र,बिष कुम्भ,गांडीव धनुष,मणि। देवताओं के ऊपर दैत्यों ने अत्याचार आरम्भ कर दिए और स्वर्ग पर अधिकार कर लिया देवता दुखी होकर भगवान बिष्णु के पास गये भगवान बिष्णु ने समुद्र मंथन करवाया उसमें धन, त्रियोदशी को धन्वंतरि वैद्य अमृत कलश लेकर निकले इसीलिए धनतेरस मनाई जाती है। चतुर्दशी को हनुमान का जन्मोत्सव होता है इसलिए कहीं कहीं हनुमान जी की भी पूजा होती है। अमावस्या वाले दिन लक्ष्मी जी समुद्र से निकलीं और उनका नारायण के साथ विवाह हुआ इसीलिए माता लक्ष्मी की पूजा होती है दक्षिण भारत में लक्ष्मी नारायण का इस दिन विवाह किया जाता है। सभी देवताओं ने लक्ष्मी नारायण का पूजन किया लक्ष्मी जी ने कहा जो आज के दिन मेरी पूजा करेगा उसके घर में धन दौलत की कमी नहीं होगी गणेश की पूजा इस लिए की जाती है कि गणेश विघ्न विनाशक और बुद्धि के देवता हैं इस कारण गणेश पूजन किया जाता है। गणेश जी सभी संकट दूर करेंगे अब लक्ष्मी जी यहां से नहीं जाएं इसलिए गणेश की पूजा होती है।
और हनुमान जी का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है इस कारण हनुमान जी की पूजा होती है चैत्र पूर्णिमा मेंहदीपुर बालाजी का प्राकट्य दिवस है इस कारण चैत्र पूर्णिमा भी हनुमान का जन्मोत्सव मनाया जाता है।
यह है सही कारण दीपावली मनाने का।जय श्री गणेश लक्ष्मी
उर्मिला पाण्डेय उर्मि कवयित्री मैनपुरी उत्तर प्रदेश।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!