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संक्षिप्त लेख: दीपावली आस्था और संस्कारों का संगम — पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’

 

भारतीय संस्कृति का एक उज्जवल पर्व दीपावली है।वो दीपो का ही नहीं बल्कि आस्था,उत्साह और संस्कारों का संगम के अनुठा त्यौहार है। दीपावली का त्यौहार असत्य पर सत्य,पराजय पर विजय,अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान का विजय प्रतीक है।श्री राम ने पिताजी के वचन पालन हेतु चौदह वर्ष वनवास।वनवास में राक्षसों का संहार और रावण का संहार करने के बाद जब अयोध्या लौटे तो उस का आगमन पर घर घर दीप प्रज्वलित कर उनका स्वागत किया था। तभी से यह पर्व हर वर्ष प्रकाश और सद्भाव का संदेश देता है। दीपावली में जो हम दीप प्रगटाते हैं हमारे भीतर आत्मा को जगाने की प्रेरणा देता है। दीपावली के दिन घर आंगन सजाते हैं।पूजन अर्चन करते हैं। दान का भी महिमा भी है। एक दूसरे भेदभाव भूलकर मिलते।ये सामाजिक एकता के प्रतीक भी है।दीपावली नवोत्साह,नवचेतना भरने का त्यौहार है।नकारात्मकता हटाकर सकारात्मक शक्ति का संचार करना है।

“जिंदगी को खुशियों से ऐसे सजाते रहिए,
बेफिक्र होकर दीपावली हर रोज मनाते रहिए।

श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’
(सुरेन्द्रनगर-गुजरात)

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