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पीढ़ियों के साहित्यकारों का अनूठा संवाद बना नवाचार का मंच, कल्प भेंटवार्ता कार्यक्रम में माँ–बेटी साहित्यकार सम्मानित

 

जयपुर। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा नवाचार से सुसज्जित साहित्यिक साक्षात्कार कार्यक्रम “कल्प भेंटवार्ता” के अंतर्गत स्थापना माह विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दो पीढ़ियों के साहित्यकारों को एक ही मंच पर संवाद के लिए आमंत्रित कर एक अभिनव पहल की गई। कार्यक्रम में मेरठ (उ.प्र.) से सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुधा शर्मा एवं उनकी पुत्री स्वाति शर्मा ‘अतुल’ को सम्मानित किया गया। संस्था की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि यह संवाद श्रृंखला साहित्य में पीढ़ियों के अनुभव और दृष्टिकोण को एक साथ प्रस्तुत करने का सार्थक प्रयास है। संयोजक डॉ. मंजू शकुन खरे के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रेरक संवाद कार्यक्रम में स्वाति शर्मा ‘अतुल’ ने भारतीय संस्कृति के पारंपरिक वैचारिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति आत्मसात करने योग्य और विश्व को दिशा देने वाली है।
कल्पकथा के यूट्यूब चैनल पर हुए लाइव प्रसारण के दौरान सुधा शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान समय में साहित्यकारों का दायित्व है कि वे समाज की समस्याओं को ईमानदारी और निर्भीकता के साथ उठाएं, ताकि साहित्य समाज का सशक्त दर्पण बन सके। कार्यक्रम का संचालन चार चरणों व्यक्तिगत परिचय, साहित्यिक यात्रा, दर्शकों के प्रश्न तथा चटपटे प्रश्न–अटपटे उत्तर—के माध्यम से किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम के समापन पर वन्दे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया। अंत में आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों एवं दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम को विश्राम दिया गया।

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