Uncategorized

देवउठनी ग्यारस — सुरेंद्र कुमार बिंदल

 

दिनांक. 1/ 11/25
दिन शनिवार
. दीपावली के ग्यारह दिन बाद आती है देवउठनी ग्यारस।
देवउठनी ग्यारस से हो जाते हैं मंगल कार्य की शुरुआत।
शादी, विवाह, भवन निर्माण, और गृह प्रवेश का मुहूर्त की होता है
शुभारंभ।
देवउठनी ग्यारस में भगवान विष्णु की होती है पूजा अर्चना।
संध्याकालीन के समय फूलों से दूर्वा से सजाया जाता है मंडप।
चारों तरफ लगाए जाते हैं गन्ने उसे पर विराजमान किया जाता है
भगवान को।
देवउठनी ग्यारस को दिवाली का दूसरा रूप बड़ी धूमधाम से
मनाया जाता हे।
देवउठनी ग्यारस के दिन ही तुलसी विवाह का संपन्न किया जाता
हे।
देवउठनी ग्यारस के दिन भगवान विष्णु का शालिग्राम के रूप
तुलसी जी का विवाह किया जाता है।
दीप प्रज्वलित करके तुलसा जी के नाम का किया जाता है।
गुणगान फिर सभी भक्तजनों को सिंघाड़े शकरकंदी का प्रसाद
बांटा जाता है।
सभी बच्चे पूजा एवं भोजन करने के बाद अपने घर के बाहर
फुलझड़ियां पटाखे छुड़ाते हैं घर में करते हैं दीप प्रज्वलित
करके लाइटिंग करके घर को सजाते हैं सब एक दूसरे के गले
मिलकर देते हैं देवउठनी की शुभकामनाएं।
स्वरचित मौलिक रचना
सुरेंद्र कुमार बिंदल लेखक एवं रचनाकार मॉडल टाउन जयपुर राजस्थान

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!