जयपुर स्थापना दिवस : राजसी विरासत और मेरे अपनत्व की कहानी

जयपुर। राजस्थान की संस्कृति, शौर्य और सौंदर्य को अपने आंचल में समेटे जयपुर का इतिहास 18 नवंबर 1727 से शुरू होता है, जब महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने इस भव्य नगरी की स्थापना की। वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य द्वारा योजनाबद्ध यह शहर अपनी गुलाबी इमारतों, चौड़ी सड़कों और अनोखी राजपूताना रचना के कारण दुनिया भर में पिंक सिटी के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
जयपुर स्थापना दिवस पर हवा महल, आमेर, जयगढ़ और चौपड़ों की रौनक एक अलग ही चमक बिखेरती है। लोकनृत्य, संगीत, परंपरा और कला—सब मिलकर आज के दिन शहर को एक उत्सव में बदल देते हैं। जयपुर की पहचान उसके किलों में जितनी बसती है, उतनी ही उसके लोगों की गर्मजोशी, बाज़ारों की चहल-पहल और संस्कृति की मिठास में भी है।मेरे लिए तो जयपुर सिर्फ एक शहर नहीं, मैं 1998 में जयपुर आई और इसी की होकर रह गई।
यह मेरा कर्मस्थल नहीं, मेरा अपना घर बन गया—मेरी पहचान, मेरी आत्मा का हिस्सा।
जयपुर स्थापना दिवस इस शहर की खूबसूरती, विरासत और हमारे उससे भावनात्मक जुड़ाव को सलाम करने का दिन है।
जयपुर वह नगर है जो इतिहास नहीं दोहराता—इतिहास रचता है।
सुनिता त्रिपाठी’अजय
जयपुर राजस्थान




