Uncategorized

अंतराष्ट्रीय कलम के सशक्त हस्ताक्षर मंच द्वारा गूगल मीट काव्यगोष्ठी में कवियों ने बहाई काव्य धारा, श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

 

अंतर्राष्ट्रीय कलम के सशक्त हस्ताक्षर मंच की गूगल मीट पर काव्य गोष्ठी रखी गई जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के साहित्यकारों ने शिरकत की। इस काव्य गोष्ठी में कनाडा से आदरणीया दुर्गेश खरे ने शिरकत कर काव्य गोष्ठी में चार चाँद लगा दिए। वहीं संपूर्ण भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों से साहित्यकारों ने अपनी काव्य रचनाओं से समां बांधा। इस काव्य गोष्ठी के कार्यक्रम अध्यक्ष झोटवाड़ा, जयपुर राजस्थान वरिष्ठ पत्रकार, लेखक जेपी शर्मा, मुख्य अतिथि दिल्ली की सुप्रसिद्ध कवयित्री, लेखिका उषा सूद थी। काव्य गोष्ठी का सफल संचालन अंतर्राष्ट्रीय कलम के सशक्त हस्ताक्षर मंच की कार्यकारी अध्यक्षा मनीषा लाठी ने बड़े ही निराले अंदाज में किया।

Oplus_131072

काव्य गोष्ठी का शुभारंभ केंद्रीय विद्यालय संगठन कानपुर की हिंदी शिक्षिका और सुप्रसिद्ध कवयित्री डाॅ मीरा कनौजिया काव्यांशी द्वारा माँ सरस्वती की संगीतमय वंदना
हंस शोभित वीणा- पाणि वेद गरिमा गायिनी मां।
नवल रस शीश है,नभ में चंद्र- सी छवि छायिनी मां।
से हुआ। मंच के कार्यक्रम संयोजक कपिल देव कृपाला ने स्वागत गीत मेरे काव्य मंच पर आए, मम स्वागत को अपनाए की प्रस्तुति देकर अतिथियों का स्वागत किया। इस बार काव्य-गोष्ठी का विषय मीठे बोल रखा गया था।

Oplus_131072

मंच के अधीक्षक एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार डाॅ मधुकर राव लारोकर मधुर ने अपनी प्रस्तुति निराले अंदाज में देते हुए कहा,
तोल मोल के बोलो बोल
बोल से दुख न हो किसी को।
इंसानियत का यह है तकाज़ा
प्रभु इंसान बनाओ तुम सबको।
मंच के सचिव डाॅ संदीप चौहान मोहन ने अपनी काव्य प्रस्तुति देते हुए कहा,
1 घनाक्षरी
“जीवन है अनमोल, बोलिएगा मीठे बोल, आगे बढ़े मेल जोल, ऐसे काम कीजिए।”
2 कुंडलिया
“बोलो मीठे बोल सब , रखकर शुभ व्यवहार।”
मंच की उपाध्यक्ष रूपा माला की काव्य-पंक्तियाँ थी,
बड़े अनमोल ये प्यारे मीठे बोल,
दुःख सारा मिट जाता है,
अंतर्मन इसे अपनाता है।
मंच के महासचिव नरेंद्र सिंह ने अपनी प्रस्तुति उल्लाला छंद में दी,
मानव वाणी बोलिए, पहले उसको तौलिए।
सत्य अरुचिकर त्याग दें, बोल मधुर रस पाग दें ।।
शीतलता उर मे रहे, निसृत शब्द को सब सहे।
गीता पुराण का कथन, हरपल बोलें मृदु वचन।।
मंच की व्यवस्थापिका दीपा शर्मा उजाला ने अपनी प्रस्तुति देते हुए कहा,
मीठे बोल तू बोल कर तो देख
सब तेरे हो जाएंगे
एक बार अपने बोल पर
सोच कर तो देख
बेगाने भी अपने नजर आएंगे
मंच की कार्यकारी अध्यक्षा और काव्य गोष्ठी की संचालिका मनीषा लाठी की काव्य-प्रस्तुति थी,
मीठे बोल है वह चाबी जो,
दिल के दरवाजे खोल दे।
कड़वे मन में पल भर में,
शहद से मिठास घोल दे।
मंच के कार्यक्रम संयोजक कपिल देव कृपाला ने अपनी प्रस्तुति इस प्रकार दी,
कविता का शीर्षक मीठे बोल
सदा मीठे बोल के,हम प्रयोग करें।
अनकही सी बोल, बोला नहीं करें।।
वाणी ही हमारा, जीवन का धन है।
कपिल मीठे बोल से, सदा मिला करें।।
उन्नाव उत्तर प्रदेश के सुप्रसिद्ध साहित्यकार अवधेश कुमार श्रीवास्तव की रचना थी,
मीठे बोल लगें प्रिय सबको,भाते जैसे मिठाई है,
एक बार कर यत्न तो देखो, कटुता की दिखे बिदाई है,
शिकागो अमेरिका की वरिष्ठ कवयित्री दुर्गेश खरे की काव्यात्मक पंक्तियां थी,
तेरी वाणी है अनमोल…हे मानव,बोलो मीठे बोल…
पहले हृदय तराज़ू तौल…फिर तू अधरों के पट खोल…

Oplus_131072

भोपाल, मध्य प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार राजीव रावत की रचना थी,
जीवन है अनसुलझी सी पहेली ,कोई उत्तर सका ना खोज।
जो बोता है वही पायेगा, मीठे मीठे बोल रे मीठे मीठे बोल।।
भोपाल से ही सुप्रसिद्ध कवयित्री मंजू शील मन ने प्रस्तुति दी,
मेरे मन की बात,,,मीठे बोल के साथ,,,,
आज नहीं तो कल हम सब चले जाएंगे,
रह जाएंगे मीठे बोल,जो हमारी याद दिलाएंगे
हापुड़, उत्तर प्रदेश के कवि प्रमोद राणा ने अपनी प्रस्तुति इस प्रकार दी,
मीठे बोल बोलकर इंसान ईमानदार को रहे लूट।
भला बुरा ना पहचाने मनमानी कर रहे नोच खसोट।।
नवादा, बिहार की वरिष्ठ कवयित्री ज्योति कुमारी की पंक्तियाँ थी,
अलग-अलग राज्यों, अलग-अलग धरा से आए,
पर शब्दों के सेतु ने सबको एक सूत्र में बाँधे।
कार्यक्रम अध्यक्ष जेपी शर्मा की पंक्तियां थी,
स्वर की देवी सरस्वती माँ
हम सब वंदन करते है
आके विराजो कंठ हमारे ,
मैया तुम्हें मानते है
डाॅ मीरा कनौजिया काव्यांशी की मीठे बोल पर आधारित काव्यात्मक पंक्तियां थी,
मीठे बोल अनमोल, सरस हृदय, सरल स्वभाव। सहृदय, अंतस परिपूरित, अमृत सम प्रेम प्रभाव।
वाणी ही तन मन में, उमंग, उत्साह, प्रेम संवर्धन।
हतोत्साहित मन, भाव, संवेग, आशा प्रोत्साहन।

मंच के संस्थापक अध्यक्ष विनोद वर्मा दुर्गेश ने मनहरण घनाक्षरी के रूप में अपनी प्रस्तुति इस प्रकार दी,
अपनी जुबां से सदा, मीठे मीठे बोल बोलें,
कटुता भरे वचन, कभी नहीं कहिए।
सभी की रचनाओं ने श्रोताओं की तालियां बटोरी। अंत में कार्यक्रम अध्यक्ष जे पी शर्मा और मुख्य अतिथि उषा सूद ने काव्य-गोष्ठी की समीक्षा करते हुए मंच की भूरी भूरी प्रशंसा की और ऐसे आयोजन के लिए मंच को बहुत-बहुत बधाई दी। अंतर्राष्ट्रीय कलम के सशक्त हस्ताक्षर मंच के संस्थापक अध्यक्ष विनोद वर्मा दुर्गेश ने अंतर्राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी की सफलता के लिए सभी का धन्यवाद किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!