भक्ति प्रसंगों से सुवासित रही २२६वीं कल्पकथा काव्य संध्या। सनातन एकमात्र धर्म है जो हर जीव में ईश्वर, वसुधैव कुटुंबकम्, सर्व जन हिताय सर्व जन सुखाए, और अतिथि देवो भव: जैसे विचारों से समृद्ध है। – कल्पकथा परिवार

सनातन एकमात्र धर्म है जो हर जीव में ईश्वर, वसुधैव कुटुंबकम्, सर्व जन हिताय सर्व जन सुखाए, और अतिथि देवो भव: जैसे विचारों से समृद्ध है। – कल्पकथा परिवार
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य, की सेवा हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि कल्पकथा परिवार की साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी पौराणिक भक्ति प्रसंगों पर आधारित काव्य रचनाओं से सुवासित होती रही।
वाराणसी उप्र के प्रबुद्ध साहित्यकार पण्डित अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप की अध्यक्षता एवं नागपुर महाराष्ट्र की विद्वान कवयित्री मेघा अग्रवाल के मुख्यातिथ्य के कार्यक्रम में श्री गणेश, भगवान दत्तात्रेय, बद्रीनारायण, माता रानी की महिमा के साथ रामायण – महाभारत आदि पर आधारित भक्ति काव्य से सजी रविवारीय संध्या में देश विदेश से विद्वान साहित्यकार जुड़े।
भास्कर सिंह माणिक के मंच संचालन में कार्यक्रम का शुभारंभ नागपुर महाराष्ट्र के बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना, सरस्वती वंदना, के साथ हुआ।
उत्तरकाशी से जुड़ीं डॉ अंजू सेमवाल ने भगवान बद्रीविशाल को दोहों के साथ प्रणाम निवेदित किया। वहीं आनंदी नौटियाल अमृता ने बद्री विशाल केदारेश्वर स्वीकार करें साष्टांग नमन रचना में भगवान बद्रीनाथ धाम की अलौकिक शोभा का वर्णन किया।
रायगढ़ छत्तीसगढ़ के युवा कवि अमित पण्डा अमिट रोशनाई ने भीष्म केशव संवाद का शब्द चित्र खींचा। वहीं गोरखपुर उप्र के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ श्याम बिहारी मिश्र ने प्रभु आधार हमारे रचना द्वारा आस्था का शिखर स्पर्श किया गया।
विजय डांगे ने भगवान दत्तात्रेय की संगीतमय मधुर वंदना की तो पवनेश मिश्र ने भगवान श्री गणेश के १०८ नामों को काव्य रचना में पिरोने का प्रयास किया।
इनके अलावा, ज्योतिषाचार्य योगेश गहतोड़ी यश, बिनोद कुमार पाण्डेय, संपत्ति चौरे स्वाति, भगवानदास शर्मा प्रशांत, सुनील कुमार खुराना, श्रीमती सांद्रा लुटावन गणेश, ज्योति प्यासी, मेघा अग्रवाल, पण्डित अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप, भास्कर सिंह माणिक, दीदी राधा श्री शर्मा, आदि ने काव्य पाठ किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में पण्डित अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप ने आयोजन की सफलता पर संतोष प्रकट करते हुए कहा कि भक्ति भाव की रचनाएँ सिर्फ शब्दों को नहीं बल्कि भावनाओं को भी पावन बनाती है। मुख्य अतिथि श्रीमती मेघा अग्रवाल ने रचनाकारों की रचनाओं की प्रशंसा करते हुए सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य की सेवा हेतु सभी का आगे आने का आवाह्न किया।
आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों, विद्वान दर्शकों, का आभार प्रकट करते हुए कल्पकथा संस्थापक दीदी राधा श्री शर्मा ने कहा सनातन ही एकमात्र धर्म है जो हर जीव में ईश्वर, वसुधैव कुटुंबकम् और अतिथि देवो भव: जैसे संस्कारों से समृद्ध है।
अंत में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् स्मरणोत्सव १५०वें वर्ष में अमर बलिदानियों को नमन करते हुए वन्दे मातरम गायन के पश्चात सर्वे भवन्तु सुखिन: शान्ति पाठ के साथ कार्यक्रम को विश्राम दिया गया।
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य, की सेवा हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि कल्पकथा परिवार की साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी पौराणिक भक्ति प्रसंगों पर आधारित काव्य रचनाओं से सुवासित होती रही।
वाराणसी उप्र के प्रबुद्ध साहित्यकार पण्डित अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप की अध्यक्षता एवं नागपुर महाराष्ट्र की विद्वान कवयित्री मेघा अग्रवाल के मुख्यातिथ्य के कार्यक्रम में श्री गणेश, भगवान दत्तात्रेय, बद्रीनारायण, माता रानी की महिमा के साथ रामायण – महाभारत आदि पर आधारित भक्ति काव्य से सजी रविवारीय संध्या में देश विदेश से विद्वान साहित्यकार जुड़े।
भास्कर सिंह माणिक के मंच संचालन में कार्यक्रम का शुभारंभ नागपुर महाराष्ट्र के बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना, सरस्वती वंदना, के साथ हुआ।
उत्तरकाशी से जुड़ीं डॉ अंजू सेमवाल ने भगवान बद्रीविशाल को दोहों के साथ प्रणाम निवेदित किया। वहीं आनंदी नौटियाल अमृता ने बद्री विशाल केदारेश्वर स्वीकार करें साष्टांग नमन रचना में भगवान बद्रीनाथ धाम की अलौकिक शोभा का वर्णन किया।
रायगढ़ छत्तीसगढ़ के युवा कवि अमित पण्डा अमिट रोशनाई ने भीष्म केशव संवाद का शब्द चित्र खींचा। वहीं गोरखपुर उप्र के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ श्याम बिहारी मिश्र ने प्रभु आधार हमारे रचना द्वारा आस्था का शिखर स्पर्श किया गया।
विजय डांगे ने भगवान दत्तात्रेय की संगीतमय मधुर वंदना की तो पवनेश मिश्र ने भगवान श्री गणेश के १०८ नामों को काव्य रचना में पिरोने का प्रयास किया।
इनके अलावा, ज्योतिषाचार्य योगेश गहतोड़ी यश, बिनोद कुमार पाण्डेय, संपत्ति चौरे स्वाति, भगवानदास शर्मा प्रशांत, सुनील कुमार खुराना, श्रीमती सांद्रा लुटावन गणेश, ज्योति प्यासी, मेघा अग्रवाल, पण्डित अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप, भास्कर सिंह माणिक, दीदी राधा श्री शर्मा, आदि ने काव्य पाठ किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में पण्डित अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप ने आयोजन की सफलता पर संतोष प्रकट करते हुए कहा कि भक्ति भाव की रचनाएँ सिर्फ शब्दों को नहीं बल्कि भावनाओं को भी पावन बनाती है। मुख्य अतिथि श्रीमती मेघा अग्रवाल ने रचनाकारों की रचनाओं की प्रशंसा करते हुए सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य की सेवा हेतु सभी का आगे आने का आवाह्न किया।
आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों, विद्वान दर्शकों, का आभार प्रकट करते हुए कल्पकथा संस्थापक दीदी राधा श्री शर्मा ने कहा सनातन ही एकमात्र धर्म है जो हर जीव में ईश्वर, वसुधैव कुटुंबकम् और अतिथि देवो भव: जैसे संस्कारों से समृद्ध है।
अंत में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् स्मरणोत्सव १५०वें वर्ष में अमर बलिदानियों को नमन करते हुए वन्दे मातरम गायन के पश्चात सर्वे भवन्तु सुखिन: शान्ति पाठ के साथ कार्यक्रम को विश्राम दिया गया।




