Uncategorized

“भाईचारे और खून का सच्चा रिश्ता” — शालिनी शर्मा

 

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में एक परिवार में दो बालक रहते थे।
बड़े भाई का नाम बड़के तथा छोटे भाई का नाम छोटका था।
दोनों भाइयों में अपार प्रेम था। वे हमेशा एक-दूसरे का ख्याल रखते और हँसी-खुशी परिवार के साथ जीवन व्यतीत करते थे।

बड़के सातवीं कक्षा में पढ़ता था, जबकि छोटका नर्सरी में।
हर सुबह दोनों एक साथ स्कूल जाते।
बड़के हमेशा अपने छोटे भाई का हाथ पकड़कर उसे स्कूल ले जाता और स्कूल से वापस भी लाता।
उनकी मित्रता और भाईचारा देखने लायक था।

माँ की जिम्मेदारी

एक दिन उनकी माताजी को किसी कार्यवश दो दिन के लिए बाहर जाना पड़ा।
जाते-जाते उन्होंने बड़के को समझाया –
“बेटा, मैं नहीं रहूँगी, इसलिए अपने छोटे भाई का पूरा ध्यान रखना।”
बड़के ने बड़े गर्व से सिर हिलाकर कहा –
“माँ, आप निश्चिंत होकर जाइए, छोटके की पूरी जिम्मेदारी मेरी है।”

माँ के जाते ही बड़के ने अपने छोटे भाई की देखभाल शुरू कर दी।
वह भोजन पकाता, दोनों को खाना खिलाता, फिर छोटके को तैयार करके स्कूल ले जाता।
स्कूल से वापस आने के बाद वह छोटके को होमवर्क करवाता, उसके कपड़े धोता और समय पर खाना खिलाता।
सचमुच, उस छोटे से उम्र में भी बड़के ने बड़ी समझदारी और जिम्मेदारी का परिचय दिया।

छोटके की बीमारी

एक दिन अचानक छोटके को तेज़ बुखार हो गया।
उसका शरीर काँप रहा था और चेहरा पीला पड़ गया।
बड़के यह देखकर घबरा गया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी।
वह तुरंत एक भगोना ठंडे पानी से भरकर लाया और रूमाल से छोटके के माथे पर पट्टी रखने लगा।

घंटों उसकी सेवा करता रहा।
अंततः छोटके का बुखार उतर गया।
छोटके ने आँखें खोलीं और मुस्कराकर अपने भाई का हाथ थाम लिया।
दोनों भाई एक-दूसरे को गले लगाकर रो पड़े।
यह दृश्य उनके भाईचारे के प्रेम का साक्षी बन गया।

माँ की वापसी

अगले दिन उनकी माँ घर लौटीं।
दोनों भाइयों ने मिलकर सारी घटनाएँ सुनाईं –
कैसे बड़के ने छोटके की देखभाल की, उसे स्कूल ले गया, खाना बनाया और बीमारी में सेवा की।

माँ की आँखें भर आईं।
उन्होंने दोनों को अपने गले से लगा लिया और गर्व से बोलीं –
“मुझे अपने बेटों पर नाज़ है। तुम दोनों ने साबित किया कि भाईचारा और प्रेम ही जीवन की सच्ची ताक़त है।”

कहानी की शिक्षा

इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि –

हमें हमेशा अपने से छोटे भाई-बहन की देखभाल करनी चाहिए।

परिवार का सच्चा सुख आपसी प्रेम और सहयोग में है।

मुश्किल समय में जिम्मेदारी निभाना ही सच्चे रिश्तों की पहचान है।
शालिनी शर्मा
रुद्रपुर, उत्तर प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!