चिंता — रमेश शर्मा

आज रीटा जी कुछ उदास सी घर पर अकेले फुर्सत से बैठीं थीं । रीटा जी हाल ही में एक प्रतिष्ठित प्राइवेट पब्लिक स्कूल से रिटायर हुए हैं।पतिदेव श्रीकांत जी एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर हैं। सुबह दस बजे आफिस केलिएनिकल जाते हैं।शाम साढ़े पांच बजे आफिस से आते हैं। एक चाय दोनों साथ पीते हैं। दिनभर के बीते समय को लेकर संक्षिप्त चर्चा होती है।
काफी सालों के बाद उन्हें यह फुर्सत का समय मिला है । दो बच्चे हैं एक बेटा एक बेटी दोनों को उन्होंने कड़ी मेहनत करके इंजीनियर बनाया दोनों की अच्छे परिवार में शादी की । दोनों अपनी अपनी गृहस्थी में मस्त हैं। हर दूसरे दिन दोनों से बात हो जाती है।
कब नौकरी के अठ्ठाईस साल निकल गए पता ही नहीं चला।।
सोचा था स्कूल वाले दुबारा फिक्स पेमेंट पर रख लेंगे। अभी रीटा जी शारीरिक और मानसिक रूप से। पूर्णतया स्वस्थ हैं। स्कूल मैनेजमेंट को एक आवेदन पत्र लिखकर भी दिया लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया ।
यही सोच कर असमंजस में थीं कि इस उम्र में नये सिरे से किसी स्कूल में जोइन करूं। दूसरी तरफ मन करता कि बहुत कर लिया अब आराम से जिंदगी निकालनी चाहिए। परेशानी यह है कि दिनभर करूं क्या । ज्यादा आराम करने से शरीर पर मोटापा आ जायेगा।
रमेश शर्मा



