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हिंदू जागृति मंच सम्भल का काव्य संगम महोत्सव सम्पन्न

भागीरथ सिन्हा के काव्य संग्रह “लहरों से टकराया करता हूं” का भी विमोचन ।

 

दिल्ली विकास मिश्र। नजर इंडिया 24

मुरादाबाद,हिंदू जागृति मंच के तत्वावधान में कल्कि तीर्थ नगरी सम्भल,उत्तर प्रदेश के डी के रिजॉर्ट्स में आयोजित भव्य काव्य संगम महोत्सव एवं सम्मान समारोह का आयोजन गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य सेवा में उल्लेखनीय योगदान देने वाले दिल्ली के प्रसिद्ध रचनाकार भागीरथ सिन्हा के काव्य संग्रह “लहरों से टकराया करता हूं” का विमोचन हुआ। उनको स्वर्गीय श्री डी. के. शर्मा स्मृति सम्मान से अलंकृत किया गया।समारोह के दौरान भागीरथ सिन्हा ने अपनी विशिष्ट शैली में श्रोताओं को भावनाओं की यात्रा पर ले जाते हुए श्रृंगार रस की सशक्त प्रस्तुति दीं। उन्होंने अपनी चर्चित कविता “वक्त शेष नहीं हुआ है” का काव्य पाठ करते हुए कहा—
“कभी पड़ोसी का दरवाज़ा बेवजह ही खटखटा लिया करो,
राम-राम, दुआ-सलाम का एक वास्ता निभा लिया करो।”
इन पंक्तियों ने सामाजिक सौहार्द और मानवीय संबंधों की गहराई को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया।
इसके पश्चात उन्होंने श्रृंगार रस की दूसरी कविता “अपनी हाल बताऊं कैसे” प्रस्तुत की, जिसमें दांपत्य जीवन की संकोचपूर्ण संवेदनाओं को अत्यंत कोमल शब्दों में उकेरा—
“ठंड की लंबी रातों में यादों में खो जाता हूं,
कभी गरम तो कभी सहमा-सा हो जाता हूं,
मन की बात कहूं कैसे…
पत्नी का आलिंगन करूं कैसे…”
कविता ने श्रोताओं को भावनात्मक रूप से गहरे तक स्पर्श किया।
कार्यक्रम में कवि की सामाजिक चेतना भी मुखर होकर सामने आई। “सर्द हवाएं” शीर्षक कविता के माध्यम से उन्होंने किसानों के संघर्ष और आशा को स्वर देते हुए कहा—
“पूस की लंबी रातों में बढ़ती जाती हैं सर्द हवाएं,
खेतों के मचान पर बैठा किसान स्नेह का दीपक जलाए,
पर इन्हीं रातों की गोद में
सुहावनी भोर जन्म लेती है।”
काव्य संगम का संचालन श सुचारु रूप से हुआ। उपस्थित साहित्य प्रेमियों, बुद्धिजीवियों एवं मंचासीन अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए भागीरथ सिन्हा के साहित्यिक योगदान को प्रेरणास्रोत बताया।इस अवसर पर उप जिला अधिकारी रामानुज, प्रतिष्ठित कवि सुखपाल गौर,अरुण दीक्षित, प्रमोद तिवारी, प्रेम सागर शर्मा, श्रीपाल शर्मा इदरीशपुरी, प्रमोद झा ,नेहा बागरी आदि उपस्थित रहे। हिंदू जागृति मंच के अध्यक्ष अजय शर्मा, व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर अतुल कुमार शर्मा, उज्जवल वशिष्ठ एवं सभी मंच पदाधिकारियों की कार्यक्रम की सफलता के लिए उल्लेखनीय भूमिका रही। कार्यक्रम का समापन साहित्य, संवेदना और संस्कारों के संगम के साथ हुआ, जिसने श्रोताओं के मन में लंबे समय तक गूंज छोड़ दी।

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