परिवर्तन — प्रवीणा सिंह राणा “प्रदन्या”

यदि हम सच में अपने जीवन में स्थाई परिवर्तन चाहते हैं, तो सबसे पहले हमें अपनी दृष्टि बदलनी होगी। अक्सर हम समस्याओं को उनके विशाल आकार के कारण असाध्य मान लेते हैं और वहीं रुक जाते हैं। हम यह भूल जाते हैं कि समस्या जितनी बड़ी दिखाई देती है, उतनी ही बड़ी हमारी सोच भी हो सकती है। समस्या के आकार पर ध्यान केंद्रित करना हमें भयभीत करता है, जबकि स्वयं के विचारों का विस्तार हमें समाधान की ओर ले जाता है।
मनुष्य की वास्तविक शक्ति उसके विचारों में निहित होती है। जब हम अपने सोचने के ढंग को सीमित रखते हैं, तब हर चुनौती पहाड़-सी प्रतीत होती है। लेकिन जैसे ही हम अपने दृष्टिकोण का विस्तार करते हैं, वही समस्या एक अवसर में बदल जाती है। विचारों की सकारात्मकता, आत्मविश्वास और धैर्य,ये तीनों मिलकर असंभव को भी संभव बना सकते हैं।
परिवर्तन बाहर से नहीं, भीतर से शुरू होता है। यदि हमारी सोच सशक्त है, तो परिस्थितियाँ स्वतः ही हमारे अनुकूल होने लगती हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम समस्याओं से डरने के बजाय अपने विचारों को ऊँचाई दें। यही ऊँचे विचार जीवन में वास्तविक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
प्रवीणा सिंह राणा “प्रदन्या”




