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संक्षिप्त लेख:अंक योग्यता का मापदंड नहीं है। — श्री पालजीभाई वी राठोड ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर-गुजरात)

 

शिक्षा पद्धति में मूल उद्देश्य व्यक्ति का सर्वांगी विकास करना होता है।छात्रों को जीवन का मूल्य समझता है।उसे जीवन में आए बाधाएं के सामने लड़ना सीखना है। व्यक्ति को जीवन जीने योग्य बनाना है। लेकिन हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली बदल गई है। छात्र कितने अंक लाते हैं वही देखा जाता है। केवल अंक पर आधारित है। लेकिन अंक योग्यता का मापदंड नहीं है।अंक ज्यादा लाने से छात्र ज्यादा योग्य है वह कहना गलत ही है। व्यक्ति अधिक योग्यताएं है वह भ्रामक है। समाजमें कई उभरती हुई प्रतिभाओं का गला घोटने वाली है।
अंक मुख्य रूप से छात्र ने निर्धारित पाठ्यक्रम को कितनी अच्छी तरह याद रखा है।अंक उसकी याद शक्ति दर्शाते हैं। लेकिन योग्यता तो बड़ा व्यापक शब्द है। योग्यता की व्याख्या सीमित नहीं है। योग्यता इसे कहते हैं व्यक्ति में तार्किक क्षमता व्यावहारिक ज्ञान नैतिकता और रचनात्मकता कितनी होती है। इन सब गुणों से व्यक्ति की योग्यता का मापदंड किया जाता है।किसी भी विषय में छात्र शत प्रतिशत अंक लाते हैं इसका मतलब यह नहीं उन्होंने जिंदगी में भी योग्यता प्राप्त की है। शत प्रतिशत अंक लाने वाला छात्र भी व्यवहारिकता में शून्य हो सकता है।शत प्रतिशत अंक लानेवाले को अपने व्यावहारिक ज्ञान से भी सुधार लाना जरूरी है।ज्यादातर कंपनियां डिग्री पर ध्यान नहीं देते।बल्कि कौशल्य पर ध्यान देते हैं।उसमें व्यवहारिकता समझ शक्ति कैसी है। कठिन परिस्थिति में से समस्या का समाधान कैसे करते हैं। टीम वर्क कैसे करते हैं।ये सब देखकर कंपनी में नौकरी पर रखते हैं।
अंक सिर्फ आपकी याद शक्ति का परिचय देते हैं। तुम्हारी सामाजिक सूझबूझ का नहीं। योग्यता केवल किताबों तक सीमित नहीं होती। अपने जो जीवन में अनुभव पाए वही आपकी योग्यता का मापदंड है।अंक प्रणाली छात्रों पर दबाव डालती है। छात्र ज्ञान प्राप्त के लिए करने के लिए नही केवल अंक लाने के लिए ही पढ़ते हैं। छात्र पाठ्यक्रम को याद करने पर ही अपना ध्यान केंद्रित करता है। समझ में या जीवन में उतारने के लिए नहीं। छात्र की रुचि किस में है उसे पर भी हमें ध्यान देने की जरूरत है। हम ऐसा नहीं करते हैं छात्र पर दबाव डालते हैं। शिक्षकों भी छात्रों को ज्यादा अंक मिले उसी तरह की पढ़ाई करता है।इस से शिक्षकों की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।अंक योग्यता का मापदंड नहीं है यह केवल एक संख्या है योग्यता का मापदंड छात्रों की समझ, ज्ञान और इनमें कितना कौशल्य है इसी पर निर्भर रहता है।

श्री पालजीभाई वी राठोड ‘प्रेम’
(सुरेंद्रनगर-गुजरात)

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