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डॉ. पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ को वर्ष 2025-26 के लिए मिली विशेष साहित्यिक उपलब्धि

बैतूल/मुलताई :- प्रख्यात कवयित्री, लेखिका और प्रखर शिक्षाविद डॉ. पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ ने एक बार फिर अपनी अद्वितीय सृजनशीलता से मध्यप्रदेश का मान बढ़ाया है। वर्ष -2025-26 में उनके असाधारण साहित्यिक योगदान और काव्य साधना को देखते हुए उन्हें विशेष सम्मान से नवाजा गया है। गोल्डन इरा बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड (ISO) द्वारा *मोस्ट आइकॉन पोएट ऑफ दी ईयर-2025-26* प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया है। डॉ. ‘अनुमेहा’ का लेखन अपनी मौलिकता और भावनात्मक तीव्रता का मेल है बल्कि सांस्कृतिक स्मृद्धि को भी बखूबी दर्शाती है ये उनके जड़ों से जुड़ाव की ऒर संकेत करता है। उनके प्रमुख कविता संग्रह’ ‘क्षितिज के उस पार’ उनके पिता की कविताओं का संग्रह है, जिसे उन्होंने संकलित कर प्रकाशित करवाया है, एवं ‘उच्छ्वास की सांस’ पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहे है। अभी कुछ दिन पूर्व ही उनके कविता संग्रह ‘उच्छ्वास की सांस’ को ‘पेंटागन वर्ल्ड रिकॉर्ड’ प्रदान किया गया है।
नगर के वरिष्ठ साहित्यकार स्व. नरेन्द्र पाल सिंह पुंडीर की पुत्री को संत मीराबाई सम्मान , माखनलाल चतुर्वेदी नव उदय साहित्य सम्मान, श्री रामधारी सिंह दिनकर, नेल्सन मंडेला इंटरनेशनल पीस अवॉर्ड, इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स अवॉर्ड, नोएल लोरेन्ज़-जेल केमुमा एफ्रो-भारतीय ट्रॉफी (एलयसीएन्स, अफ्रीका) , विश्व काव्य रत्न (लुंबनी, नेपाल) जैसे सैकड़ों सम्मान प्राप्त कर चुकी है। 100 से अधिक आलेख एवं 450 से अधिक साझा काव्य संकलनों में उनकी कविताओं ने पाठकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी है। अभी उनके चार कविता संग्रह एवं एक काव्य संकलन प्रकाशनार्थ है। राष्ट्रीय एवं अंतरष्ट्रीय मंचो पर एवं पत्र पत्रिकाओं साथ ही न्यूज पेपर्स में लगातार उनकी कवितायें एवं आलेख प्रकाशित होते रहते है।
वरिष्ठ साहित्यकार स्व. नरेन्द्र पाल सिंह पुंडीर की पुत्री होने के नाते डॉ. पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ ने न केवल अपनी पारिवारिक विरासत को आगेC बढ़ाया है, बल्कि अपनी मौलिकता के जरिए साहित्यिक जगत में अपना एक विशिष्ट स्थान भी बनाया है।
तीन बार की वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डॉ. पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ की बायोपिक एवं बायोग्राफी गूगल की 14 वेबसाइटों पर भी उपलब्ध है।

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