Uncategorized

त्यौहारों पर ख़रीददारी मज़ा या सजा..अलका गर्ग, गुरुग्राम

 

त्यौहारों पर ख़रीददारी अगर समझदारी से की जाए तो मज़ा है और अगर देखादेखी नक़ल और झूठी शान के लिए की जाए तो बहुत बड़ी सजा है।
कई बार सजा का पता हमें बाद में चलता है जबकि जोश में आ कर होश खोने की बात को चरितार्थ करते हुए हम ज़रूरत से ज़्यादा खर्च कर बैठते हैं और सालों उसकी उधार की किश्तें चुकाते रहते हैं।कई बार तो जल्दबाज़ी और त्यौहारों की भीड़ भाड़ में ख़रीदी गई वस्तु ख़राब भी निकल जाती है कई बार घर में यूँ ही बिना काम के पड़ी रहती है क्यूँकि हमारे साथी को देख कर हमने भी ख़रीद ली थी।
त्यौहारों के मौसम में बाज़ारों में बहुत लुभावने छूट के ऑफ़र लोगों को और अधिक उकसाते है ।न चाहते हुए भी कभी बच्चे कभी महिलायें और कभी खुद भी झाँसे में आ कर बहुत खर्च कर डालते हैं।
कुल मिला कर यदि हम त्यौहारों में एक निश्चित बजट बना कर अक़्लमंदी के साथ अपनी ज़रूरतों को प्राथमिकता देते हुए ख़रीददारी करते हैं तो मन और जेब पर कोई बोझ नही पड़ेगा। नामी ब्रांड से सामान मँगाने की बजाय लोकल बाज़ार से सामान ख़रीदना काफ़ी किफ़ायती रहेगा और साथ ही कुछ पहचान के और कुछ गरीब दुकानदारों की मदद भी हो जाएगी तो उनके साथ साथ हमारी ख़रीददारी भी वाक़ई मज़ेदार हो जाएगी।
आजकल ऑनलाइन ख़रीददारी का हद से ज़्यादा चलन होने के कारण त्यौहार तो क्या रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में भी ख़र्च बहुत बढ़ गया है।बस जो दिमाग़ में आया ,फौरन बटन दबाया और कुछ ही घंटों में या अगले ही दिन चीज़ हाज़िर है।जिसके कारण बिना ज़रूरत का सामान घर में भरता जाता है।त्यौहारों में बाज़ार की रौनक देखते हुए ख़रीददारी करने का आनंद ही कुछ और था।कुछ ग़ैर ज़रूर वस्तुएं सूचीबद्ध होने के बाद भी अनावश्यक समझा कर छोड़ दी जाती थीं परंतु अब ऑनलाइन खरीदारी तो सोचने का मौक़ा ही नहीं देती।घर बैठे शॉपिंग का नशा हरेक आयु और आय वर्ग के लोगों के सर पर चढ़ गया है।
कुल मिला कर बाज़ार जा कर या ऑनलाइन जैसे भी खरीदारी करें. .अपनी जेब सुर जरूरत के हिसाब से करें जिससे त्यौहारों की खरीदारी मजा के बदले सजा न बन जाये।

अलका गर्ग, गुरुग्राम

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!