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राष्ट्रध्वज तिरंगा के गौरव गान से अनुप्राणित २४४वीं कल्पकथा साप्ताहिक काव्यगोष्ठी

 

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने बताया कि संस्था के तत्वावधान में राष्ट्रभक्ति की भावधारा से ओतप्रोत २४४वीं साप्ताहिक काव्यगोष्ठी का भव्य एवं गरिमामयी आयोजन राष्ट्रध्वज तिरंगा के सम्मान में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन ने साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रप्रेम का अद्वितीय समन्वय प्रस्तुत करते हुए उपस्थित श्रोताओं के हृदय में देशभक्ति की अमिट छाप अंकित की।

कार्यक्रम का प्रभावी एवं सुसंगठित संचालन भास्कर सिंह माणिक एवं अमित पंडा अमिट रोशनाई द्वारा अत्यंत कुशलता के साथ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आदरणीया अर्चना द्विवेदी गुदालु ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में बुंदेली लोक गायिका एवं साहित्यकार भारती नेमा की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा को और अधिक आलोकित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा प्रस्तुत संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने समस्त वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिसिंचित कर दिया। तत्पश्चात राष्ट्रध्वज तिरंगा की महिमा, उसके त्याग, शौर्य, शांति और समृद्धि के प्रतीकात्मक अर्थों को अभिव्यक्त करती हुई काव्य प्रस्तुतियों की मनोहारी श्रृंखला प्रारंभ हुई।

इस अवसर पर देश के विभिन्न अंचलों से जुड़े विद्वान सृजनकारों भावना कौर, मनवीन सिंह, सुरेश कुमार वर्मा रातावल, ज्योति देशमुख, नंदकिशोर बहुखंडी, ज्योति प्यासी, सुनीता रानी ममगाई, दिनेश दुबे, रमापति मौर्य, हेमचन्द्र सकलानी, चन्द्रा नेमा, डॉ. श्याम बिहारी मिश्र, विष्णु शंकर मीणा, सांद्रा लुटावन गणेश, पण्डित अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप, भारती नेमा, अर्चना द्विवेदी गुदालु, विजय रघुनाथराव डांगे, भास्कर सिंह माणिक, अमित पण्डा अमिट रोशनाई, पवनेश मिश्र—ने अपनी ओजस्वी एवं भावपूर्ण रचनाओं से राष्ट्रप्रेम की भावना को सजीव कर दिया।

काव्यगोष्ठी में प्रस्तुत रचनाओं ने तिरंगे के केसरिया रंग के त्याग और वीरता, श्वेत रंग की शांति और सत्यनिष्ठा तथा हरे रंग की समृद्धि और आशा के संदेश को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। इन प्रस्तुतियों ने श्रोताओं के मन में राष्ट्र के प्रति गर्व, सम्मान और समर्पण की भावना को सुदृढ़ किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” का सामूहिक गायन किया गया, जिसने सम्पूर्ण वातावरण को देशप्रेम की पावन ऊर्जा से अभिसिंचित कर दिया।

अंततः आयोजन के समापन पर दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा द्वारा आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों एवं समस्त दर्शक-श्रोताओं के प्रति हृदयपूर्ण आभार एवं कृतज्ञता व्यक्त की गई। यह आयोजन न केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति का सशक्त मंच सिद्ध हुआ, बल्कि राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और सृजनशीलता का प्रेरणादायी उत्सव भी बन गया।

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