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अंक योग्यता का मापदंड नहीं है — सीमा पुरबा ‘ सिम्मी

 

यह कथन बिल्कुल सत्य है। दरअसल अंक और योग्यता दो अलग – अलग विषय है । किसी भी परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन एक दिन के प्रदर्शन को दर्शाते है और उसकी रटने की क्षमता, विषय पर पकड़ और शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ परीक्षार्थी का मानसिक स्वास्थ्य भी । अगर बच्चा पढ़ाई में बहुत अच्छा है ।हमेशा अच्छे अंक लाता हो लेकिन अगर किसी परीक्षा के समय वह बीमार हो जाता है या फिर किसी वजह से उसका मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो फिर वह परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता है और अच्छे अंक लाने में असमर्थ हो जाता है । इसका मतलब यह नहीं कि उसकी योग्यता में कमी है ।
दूसरी तरफ ऐसा भी हो सकता है कोई बच्चा पढ़ाई में बिल्कुल भी अच्छा न हो , विषय पर पकड़ भी उसकी अच्छी न हो लेकिन रटने में वो माहिर हो, तो उसके अच्छे अंक आ ही जाते है।
अच्छे अंक लाने का मतलब फिर यह नहीं है कि वह योग्य है या फिर उसमें व्यावहारिकता है। उसमें नेतृत्व की भावना है या फिर जीवन के संघर्षों से सामना करने का जज्बा।
मेरे जीवन के अनुभव में भी मैने पाया कि जो मेरे साथ पढ़ते थे और जो कक्षा में प्रथम आते थे वे उतने सफल नहीं रहे जितना मैने उम्मीद की थी । बल्कि जो बिल्कुल पीछे की सीट पर बैठते थे हमेशा शिक्षक से डांट खाते थे उनमें से आज बहुत सारे सफलता की सीढ़ी चढ़ चुके है । जिनको ज्यादा अंक आते थे वे महज एक पेपर पर प्रिंट होकर रह गए उनके पास।।
असल में अपने कौशल का विस्तार , व्यवहारिक ज्ञान , जिंदगी में संघर्षों से सामना करने का साहस और कड़ी मेहनत के साथ – साथ आत्मविश्वास ही सफलता तक पहुंचाती है। इसके अलावा दूसरा कोई भी शार्ट कट नहीं है ।

सीमा पुरबा ‘ सिम्मी
स्वरचित

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