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युद्ध: केवल सीमाओं पर नहीं, जीवन के हर कोने में है। — मंजू शर्मा ‘मनस्विनी’

 

युद्ध… यह शब्दमंजू शर्मा ‘मनस्विनी’ सुनते ही हमारे मन में बम, गोलियां और तबाही की तस्वीरें उभरती हैं। लेकिन सच यह है कि युद्ध केवल देशों के बीच ही नहीं होता। यह शहरों में, घर-परिवारों में, और सबसे गहरा युद्ध हमारे अपने मन में चलता है।
जहां युद्ध होता है, वहांँ संवेदनाओं की जगह नफरत ले लेती है और जीत की चाह इंसानियत पर भारी पड़ जाती है। यही कारण है कि युद्ध का परिणाम कभी भी पूरी तरह सकारात्मक नहीं होता। जीतने वाला भी कहीं न कहीं हारता है, मानवता हार जाती है।
सदियों से यह परंपरा रही है कि ताकतवर, कमजोर को दबाने की कोशिश करता है। इतिहास गवाह है कि बड़े-बड़े साम्राज्य अपने प्रभुत्व के लिए लड़े। आधुनिक समय में भी महाशक्तियाँ अपने वर्चस्व को बनाए रखने के लिए संघर्ष करती रही हैं। अमेरिका जैसे देशों ने विश्व में अपनी शक्ति स्थापित करने का प्रयास किया, लेकिन हर बार परिस्थितियों ने यह सिखाया कि कोई भी देश अकेला पूर्ण नहीं होता।
हर देश के पास कुछ न कुछ विशेष होता है। कहीं संसाधन हैं, कहीं तकनीक, कहीं मानव शक्ति। यही विविधता एक-दूसरे पर निर्भरता को जन्म देती है।

इतिहास गवाह है जब दो विश्व युद्ध हुए थे।

प्रथम 1914 से 1918 तक और द्वितीय विश्व युद्ध
1939 से 1945 ये दोनों युद्ध मानव इतिहास के सबसे विनाशकारी युद्ध रहे।
इन युद्धों ने न केवल लाखों लोगों की जान ली, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया।
द्वितीय विश्व युद्ध में हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए गए, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि युद्ध की “जीत” भी कितनी भयावह हो सकती है।

रूस-यूक्रेन युद्ध
2022 से शुरू हुआ आज के समय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह युद्ध केवल दो देशों के बीच सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है।
गैस और तेल संकट आम लोगों की बढ़ती मुश्किलें
आज के समय में युद्ध का सबसे बड़ा प्रभाव केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है खासतौर पर गैस और तेल के कारण। लोग परेशान हैं होस्टल,मैश, में गैस नहीं पहुंचने के कारण खाना नहीं बन रहा।

गैस सिलेंडर महंगे होने से मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों का बजट बिगड़ जाता है। कई लोगों को अपनी आवश्यक जरूरतों में कटौती करनी पड़ती है।
युद्ध कभी भी केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। यह धीरे-धीरे हर घर, हर व्यक्ति और हर भावना को प्रभावित करता है।
यह हमें यह सिखाता है कि दुनिया में कोई भी देश या व्यक्ति पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है। हम सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
इसलिए, युद्ध की बजाय सहयोग और सह-अस्तित्व ही वह मार्ग है जो मानवता को सही दिशा दे सकता है।
क्योंकि, जीत वही है, जहांँ इंसानियत बची रहे।

मंजू शर्मा ‘मनस्विनी’

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