संस्मरण – खुद को प्रेम करे– प्रेममणी एसलीना सिमरन नागपुर महाराष्ट्र

उन दिनों मेरी उम्र 30 साल थी,मै बतौर नर्स एक स्त्रीरोग विशेषज्ञ के
नर्सिंग होम में कम करती थी,
घर के ढेरो काम निपटाकर जॉब पर जाती और वापस आकर फिर घर समेटना यही मेरी दिनचर्या थी,
मुझे कभी भी घर का काम या दूसरे काम छोड़ जॉब पर जाना या कही भी जाना आज भी गवारा नहीं है,
तब मैं लगातार 18दिन नाइट शिफ्ट करती सुबह वही फ्रेश होकर कंप्यूटर क्लास करके घर जाती नाइट ड्यूटी के लिए आते वक्त शाम को इंग्लिश कोचिंग कर ड्यूटी आती थी,
साथ ही मैंने अपनी पढ़ाई भी पूरी की एम कॉम,एम ए किया,
आज भी मै पढ़ाई को जीवन में सबसे अधिक महत्व देती हूं और आगे पढ़ने की तैयारी कर रही हूं,
मुझे पढ़ना बहुत पसंद है,इसलिए हर साल मै कुछ पढ़ाई करती हूं,
कुछ लोग कहेंगे डिग्री जमा करने से क्या फायदा,
लेकिन मैं कहूंगी आत्मसंतुष्टि से ,नॉलेज हासिल करने से अच्छा कुछ नहीं,
इससे मुझमे आत्मनिर्भरता आती है
मुझे जीने का जज्बा आता है,
साथ ही आत्मविश्वास जागृत होता है और जागृति,जोश,उल्लास
हृदय में पल्लवित होता है,
आज मैं इतनी तो cs सक्षम हूं कि कुछ भी पढ़ाई कर सकूं,
लेकिन एक दौर ऐसा भी था कि मेरे पढ़ाई में तेज होने के बाद भी अस्वस्थता के कारण मेरे रिजल्ट बिगड़ते थे,
सरकारी जॉब की हार्दिक इच्छा भी 5 सालों की आर्थिक तंगी के कारण धराशायी हो गई,फिर भी आज मुझे इतना आत्मविश्वास है कि मैं कुछ भी कर सकती हूं,
ये मुझमें अपनी पढ़ाई के कारण ही आता है,
इन सब बातों से मैने स्वाभिमान की रक्षा करना और विपरीत परिस्थितियों में जीना सीखा है,
उन दिनों मेरी तबियत अधिक खराब थी तब ईश्वर की असीम कृपा मुझ पर हुई इसलिए आज मैं जीवित हूं,
और इसलिए मेरी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि मैं हर हाल में खुश रहकर आगे बढूं और जीवित रहूं,
लेकिन पिछले दिनों जब मेरी शादी हुई मैने विपरीत परिस्थितियों का सामना किया
मै कमरे में देर तक आसूं बहाती,ईश्वर से प्रार्थना करती
खुद को असहाय,तिरस्कृत,
अपमानित महसूस करती,
मुझे किसी ने कितना भी दुख पहुंचाया,किसी ने साथ नहीं दिया,
हर एक ने मुझे कोसा,ताने मारे,लज्जित किया, मेरी नामधराई हुई,
एक बच्चे की चाह में मैने अपने आप को कुछ नहीं समझा उपचार की हर विधि से गुजरने की लिए खुद को झोक दिया,
मैने बहुत दिनो तक निराशा,अवसाद और दुख में जीवन बिताया,
लेकिन तब भी पढ़ाई को अहमियत दिया,
कोई मुझे समझे या न समझे मुझे अपने आप को समझना था वो भी मुझसे नहीं हुआ,
ऐसा अवसर बहुतों के जीवन में आता है
मुझे अहसास हुआ उनका जीवन कितना दुख में बीतता होगा,
मुझे आज लगता है कि मनुष्यों के जीवन में हरेक पड़ाव बहुत मायने रखते है क्योंकि ये हादसे हमे औरों को प्रेम करना और उन्हें समझना सिखाते है,
इन सब बातों से मैने बहुत कुछ सीखा,औरों को सम्मान देना सीखा
मुझमें जो भी कमी थी उसकी भरपाई हुई,
कहते है ना
बुरे वक्त से अच्छा शिक्षक कोई नहीं होता,
आज मैं महिलाओं की स्थिति को करीब से समझती हूं,इसलिए महिलाओं के लिए स्वतः ही दिल से सम्मान बढ़ जाता है,
उनके त्याग,समर्पण की कद्र बढ़ जाती है,
फिर भी कुछ अपवाद होती है उन सब प्रिय महिलाओं से कहना चाहती हूं कृपया एक दूसरे का सम्मान करे,एक दूसरे को समझे,एक दूसरे को आगे बढ़ाने में मदद करे,
और खुद के स्वाभिमान की रक्षा करे,खुद का सम्मान करे और खुद को प्रेम करे,अपनी सुरक्षा का ध्यान रखे,
कुछ नया सीखे,अपने पैरों में खड़े हो जाए,आत्मनिर्भर बने, औरों की मदद करे,अपनी नींव मजबूत करे,जागृत रहे और जीवन की नयी शुरुवात करे,कभी हार न माने,
आप अपनी प्रतिभा को पहचाने,उसमें आगे बढ़े,
ध्यान करे,प्रार्थना में समय बिताए,और जाने ईश्वर के लिए हर व्यक्ति अनमोल है,उन्होंने हरेक को एक महान उद्देश्य से रचा है,
प्रियो आप किसी से कम नहीं है,
मैने ऐसे ही घोर परिस्थिति में खुद का साथ दिया खुद को प्रेम किया ईश्वर का सहारा लिया और अपनी प्रतिभा को पहचान कर उस क्षेत्र में बढ़ने का प्रयत्न किया,
एक ही बात कहूंगी कि आप हर हाल में पढ़ाई
पूरी करे और आत्मनिर्भर बने,आप एक चरित्रवान स्त्री बने, पुरानी सारी गलतियों को त्यागे और शुद्धता में जीवन यापन करे,
अपने स्वाभिमान की रक्षा करे,खुद के लिए खड़े होवे,अपने लक्ष्य को पूरा करने का प्रयत्न करे,खुद को प्रेम करे और एक नयी शुरुवात करे,
सभी महिलाओं को हृदय की अन्नत गहराई से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
प्रेममणी एसलीना सिमरन
नागपुर महाराष्ट्र




