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आदर्शों के पथिक: केसरा राम दाहिया जी लेखक: दीपक (दामाद) – दीपक की कलम से

आदर्शों के पथिक: केसरा राम दाहिया जी
लेखक: दीपक (दामाद) –* दीपक की कलम से
केसरा राम दाहिया जी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ, लेकिन उनके जीवन ने असाधारण ऊँचाइयाँ छुईं। उनका पूरा जीवन डॉ. भीमराव अंबेडकर के आदर्शों, सत्य, ईमानदारी, समाजसेवा और निडरता का जीता-जागता प्रमाण रहा।
उन्होंने आबकारी विभाग में सब-इंस्पेक्टर के पद पर अपनी सेवा की शुरुआत की। इस दौरान वे अत्यंत सिद्धांतवादी और निडर रहे। अवैध शराब के भट्टियों और कारखानों को बंद करवाने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। कई बार अवैध शराब कारोबारियों ने उन पर गोलियाँ भी चलाईं, लेकिन वे बाल-बाल बच गए।
अपनी ईमानदारी और साहस के कारण विभिन्न जिलों में उनकी पोस्टिंग के दौरान सभी वर्गों के लोग उन्हें आदर से देखते थे। उनका सरल, सभ्य और मिलनसार स्वभाव प्रशासनिक एवं सामाजिक स्तर पर उन्हें प्रिय बनाता रहा।
वर्ष 2000 में, जब मेरी बैंक ऑफ बड़ौदा में पीओ के रूप में श्रीगंगानगर पोस्टिंग हुई, तब एक मित्र के माध्यम से मेरा परिचय केसरा राम दाहिया जी से हुआ। पहली मुलाकात में ही उनके उच्च विचारों, डॉ. अंबेडकर के प्रति गहन समर्पण और समाज के प्रति प्रेम ने मुझे गहराई से प्रभावित किया। इसी वर्ष एक शुभ मुहूर्त में मुझे उनके परिवार से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।नवंबर 2003 में उनका यह संबंध और गहरा हुआ, जब मेरी शादी उनकी पुत्री दीपिका से हुई। इस रिश्ते ने मुझे उनके परिवार का हिस्सा बना दिया। उनकी धर्मपत्नी (मेरी सासू माँ) के साथ भी मेरे अत्यंत स्नेहपूर्ण संबंध बने रहे। उनके दोनों सुपुत्र आज सफल मुकाम पर हैं, और उनकी एकमात्र पुत्री दीपिका आज स्कूल लेक्चरर के रूप में कार्यरत हैं तथा पिता के आदर्शों पर चलते हुए समाजसेवा में योगदान दे रही हैं।
डॉ. अंबेडकर जयंती और परिनिर्वाण दिवस जैसे अवसरों पर मैं उनके साथ विभिन्न स्थानों पर गया। श्रीगंगानगर से लेकर करनपुर, पदमपुर, रायसिंहनगर, जयपुर, बीकानेर, दिल्ली, सिरसा, हिसार तक – हर जगह उनके साथ समाज के प्रति उनका उत्साह और लगाव देखकर मन प्रसन्न हो जाता था। वे न केवल दलित समाज, बल्कि सभी वर्गों के बीच सम्मानित थे। पूरे राजस्थान में उनके सामाजिक संबंध गहरे थे। वे जहाँ भी जाते, मानसिक या आर्थिक सहयोग अवश्य देते।
वर्ष 2011 में वे सिरोही जिले से जिला आबकारी अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए। उनकी विदाई एक भावभीनी और यादगार घटना थी। जिले के उच्चतम प्रशासनिक अधिकारी, समाज के सभी वर्गों के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे। उनकी सेवाओं का यह सम्मान उनके समर्पण का प्रमाण था।सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद उन्होंने विश्वास मेडिटेशन स्कूल, हनुमानगढ़ रोड, श्रीगंगानगर में प्रिंसिपल के रूप में स्वेच्छा से (बिना किसी मानदेय के) कार्य करना शुरू किया। लगभग 14 वर्षों तक उन्होंने वहाँ निःशुल्क सेवाएँ दीं। यह स्कूल गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा, किताबें और अवसर प्रदान करता है। वे स्कूल की हर समस्या – प्रशासनिक स्वीकृतियाँ, सुविधाएँ – के लिए तत्पर रहते। बीमार होने पर भी एक दिन स्कूल नहीं छोड़ते थे। बच्चों को चाहे वह खेल किस स्तर पर हो या पढ़ाई के स्तर पर वह इसे मेरिट तक पहुँचाने में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
वर्ष 2013 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से रायसिंहनगर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। अच्छे मतों और जनता के पूर्ण सह योग से उन्होंने समाज में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की।
मेरी बैंक सेवा के दौरान (2012-2015) उनका भरपूर सहयोग मिला। उनके नाम और सम्मान से कई बड़े कार्य संपन्न हुए, बड़े ग्राहकों से मुलाकातें हुईं, जिससे बैंक को भी लाभ हुआ।
जीवन में उतार-चढ़ाव आए, पारिवारिक-सामाजिक या वित्तीय समस्याएँ आईं, लेकिन उन्होंने हर बार पिता की तरह मेरी मदद की। केसाराम दहिया जी मेरे लिए पिता-तुल्य थे। हर मुलाकात में वही स्नेह, वही मार्गदर्शन, वही विश्वास मिलता जो पिता से मिलता है। उनकी मौजूदगी में मन को सुकून रहता।
उन्होंने अनेक युवाओं को रोजगार दिलवाकर कई परिवारों के चूल्हे जलाए।आज वे हमारे बीच शारीरिक रूप से नहीं हैं, लेकिन उनके आदर्श, विचार और समर्पण श्रीगंगानगर से पूरे राजस्थान में जीवित हैं। हम उनके बताए मार्ग पर चलते रहेंगे। उनका सर कभी नहीं झुकने देंगे।हम कामना करते हैं कि परमात्मा उन्हें शांति प्रदान करें।
जय भीम! जय भारत!— दीपक की कलम से

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