श्रीपाल सिंह क्षेम की 104वीं जयंती पर कवि सम्मेलन का आयोजन

जौनपुर। “एक पल ही जियो, फूल बनकर जियो, शूल बनकर ठहरना नहीं…” जैसी जीवनदृष्टि को अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज तक पहुंचाने वाले जौनपुर के कालजयी रचनाकार स्वर्गीय श्रीपाल सिंह क्षेम की 104वीं जयंती पर बुधवार की शाम साहित्य प्रेमियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी स्मृति में नगर के सिद्धार्थ उपवन सभागार में पुण्य स्मरण कार्यक्रम एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा, प्रशासन एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने सहभागिता करते हुए क्षेम जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया तथा उनकी रचनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक नगर आयुष श्रीवास्तव ने डॉ. क्षेम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी रचनाओं ने समाज को प्रेम और आत्मीयता का संदेश दिया है। उन्होंने कहा, “क्षेम जी जौनपुर की साहित्यिक धरोहर हैं। उनकी रचनाओं को संरक्षित करने के साथ ही उन्हें विस्तार देने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है। साहित्यकारों की रचनाएं समाज को दिशा देने का कार्य करती हैं और क्षेम जी का साहित्य आज भी प्रासंगिक है।” उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्यकारों की स्मृतियों को जीवंत रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. आर.एन. त्रिपाठी ने कहा कि क्षेम जी ने अपनी साहित्यिक रचनाओं के माध्यम से छायावाद काल में हिंदी भाषा को मजबूती प्रदान की। उन्होंने कहा, “जौनपुर के हिंदी जगत का स्वर्णिम काल पंडित रूप नारायण त्रिपाठी और क्षेम जी की रचनाओं का काल रहा है। क्षेम जी का साहित्य जौनपुर की गौरवशाली साहित्यिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उनकी रचनाओं को व्यापक स्तर पर सामने लाने की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. मनोज मिश्र ने क्षेम जी की दुर्लभ रचना का सस्वर पाठ कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने पढ़ा, “आंधियों में बसेरे मिलेंगे, डूबता सूर्य यह कह गया है, फिर सबेरे-सबेरे मिलेंगे…” उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति से सभागार का वातावरण साहित्यिक और भावुक हो उठा। श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच क्षेम जी के साहित्य को नमन किया। विशिष्ट अतिथि एवं पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष दिनेश टंडन ने कहा कि साहित्यकारों की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाए रखना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “क्षेम जी की स्मृतियों को चिरस्थायी रखने के लिए नगर पालिका की ओर से नगर के शेषपुर तिराहे पर क्षेम उपवन की स्थापना कराई गई है। इसी परिसर में उनकी आदमकद प्रतिमा भी स्थापित कराई गई है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को जान सकें।” उन्होंने कहा कि स्मृति स्थल और प्रतिमाएं साहित्यकारों के योगदान को समाज के बीच जीवित रखने का माध्यम हैं।
कवि सम्मेलन में देर रात तक गूंजती रहीं तालियां
कार्यक्रम के दूसरे चरण में आयोजित कवि सम्मेलन में देश के नामचीन रचनाकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से स्वर्गीय श्रीपाल सिंह क्षेम को श्रद्धांजलि दी। राजस्थान के कोटा से पधारे प्रसिद्ध गीतकार कुँवर जावेद ने अपनी गीतात्मक एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने “अब अपनों में अपनापन तो है ही नहीं, पाकिस्तान बुलाए तो क्यों जाऊं…” जैसी पंक्तियां सुनाकर श्रोताओं में देशप्रेम और सामाजिक संवेदना का भाव जगाया। उनकी रचनाओं पर पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। उन्होंने अपनी रचनाओं में अपनी मिट्टी, पुरखों और संस्कारों से जुड़े भावों को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतापगढ़ से पधारी कवयित्री प्रीति पांडेय ने प्रेम और समर्पण से ओतप्रोत रचना प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। उन्होंने कहा, “कठिन होगा ऐ जीवन, जानते हो, प्रेम कितना है पावन, जानते हो। प्रेम की डगर है साधिका, तक मैं न जाऊंगा द्वारिका तक…” उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं और कवयित्री का उत्साहवर्धन किया। वहीं प्रयागराज से आए मशहूर हास्य-व्यंग्य कवि नजर ने अपनी चुटीली और व्यंग्यात्मक रचनाओं से पूरे सभागार को ठहाकों से भर दिया। उन्होंने पुलिस व्यवस्था और सड़कों की स्थिति पर व्यंग्य करते हुए जैसे ही कहा, “पुलिस वाले बड़े वाले भगवान हैं, सारी सड़कें गड्ढामुक्त हो जाएंगी…” श्रोता हंसी से लोटपोट हो गए। इसके बाद उन्होंने “आंखों में आंसू भी होंगे, जज्बात तो आने दो, रात तो आने दो…” जैसी पंक्तियों से माहौल को भावनात्मक रंग भी दिया। उनकी हास्य-व्यंग्य रचनाओं पर देर तक तालियां गूंजती रहीं। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय श्रीपाल सिंह क्षेम ने अपनी लेखनी के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध करने के साथ ही समाज में प्रेम, आत्मीयता और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने का कार्य किया। उनकी रचनाओं में जीवन के विभिन्न पक्षों की गहरी अनुभूति दिखाई देती है, यही कारण है कि उनकी साहित्यिक विरासत आज भी प्रासंगिक बनी हुई है। कार्यक्रम के माध्यम से जौनपुर की समृद्ध साहित्यिक परंपरा और क्षेम जी के योगदान को याद करते हुए उनकी रचनाओं को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। कवि सम्मेलन में देर रात तक गीत, कविता, हास्य और व्यंग्य की प्रस्तुतियों का दौर चलता रहा और श्रोता साहित्यिक रस में सराबोर रहे। इस मौके पर राममोहन ंिसह पूर्व आईपीएस, संजय सिंह, पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह, जितेन्द्र प्रताप सिंह, सूर्य प्रकाश सिंह मुन्ना, सुभाष सिंह, रामकृष्ण त्रिपाठी, शशि सिंह, रत्नाकर सिंह, रवीन्द्र प्रताप सिंह, अजीत सिंह, ऋतुराज सिंह, लोलारख दूबे, अनिल पांडेय, अर्जुन शर्मा, रामसिंगार शुक्ल गदेला, शंभूनाथ सोलंकी, राजेश मिश्रा, डा. सर्वेश सिंह, सर्वेश सिंह, संजय उपाध्याय, अजय सिंह, रजनीश सिंह, राजेश सिंह, ब्रिजेन्द्र सिंह, रामदयाल द्विवेदी, शीतला मौर्य, कमलेश अग्रहरि, डा. जेपी मौर्य, गौरव, राजेश मौर्य, शशिशेखर सिंह, भानु प्रताप, विनोद आदि मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत जौनपुर पत्रकार संघ के अध्यक्ष शशिमोहन सिंह क्षेम ने किया। संचालन डा. मधुकर तिवारी और आभार प्रदीप सिंह सपफायर ने व्यक्त किया।




