लघुकथा: विश्वासघात महा पाप – पालजीभाई राठोड़ ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर गुजरात)

विश्वास घात महा पाप होता है। किसी के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए।अति विश्वास अति घातक होता हैं। किसी पर कभी सोच समझ कर विश्वास करना चाहिए।एक छोटा सा गांव था इसमें परसोतम खेती करते थे।एक साथी मगन रखा हुआ था। उसके खेत के पास में ही अमरशी का खेत था।एक बार परसोतम और मगन दोनों ट्रैक्टर लेकर खेत आयें।अमरशी भी वहां था।अमरशी ने कहां; ‘परशोतम खेत के बीच में जो पत्थर रखा था वो क्यों उखाड़ दिया और मेरी दो चार फीट जमीन भी तूने ले ली है’। ऐसे में बोला चाली हो गई और दोनों के बीच झगड़ा हो गया। मगन समझदार था। उसने सोचा ऐसी स्थिति में बहस छोड़ देनी चाहिए जब सामने वाला समझना नहीं चाहता हो।उसने कहां;’भाई,जर जमीन और जोरू कजिये के छोरु’।दोनों को शांत किया।अभी तो अमरशी शांत हो गया पर ये बात उसने मन में रखी।उस दिन से वो परशोतम के साथ अच्छा व्यवहार करने लगा। कभी कभी खेत में आए तो चाय पीने भी बुलाता था। उसके साथ अच्छी अच्छी बातें करते थे। पर मन में कुछ और था।एक दिन परशोतम अकेला खेत आया।उस वक्त अमरशी ने प्लान बना लिया।आज अच्छा मौका है कोई साथ भी नहीं है।आज परशोतम का काम तमाम कर दीया जाय। ऐसा सोच कर अमरशी ने परशोतम को चाय पीने के लिए बुलाया।चाय में घेन की गोली डाल दी। परशोतम ने चाय पी और बेभान हो गया। बड़ा पत्थर सर पर ठोका और पत्थर के साथ बांधकर कुएं में फेंक दिया। अमरशीने परशोतम के साथ विश्वासघात किया।दगा करके परशोतम का खून कर डाला। शाम होने पर भी परशोतम घर न आया तो घर वालों को चिंता होने लगे। उसके साथी मगन होशियार था उसने पुलिस स्टेशन जाकर फरियाद दर्ज की।पुलिस ने पूछा;’
परशोतम के साथ कोई लड़ाई झगड़ा किसी के साथ कोई बात का वैर भाव हो तो बताना।’ मगनभाई ने कुछ दिन बाद जो कुछ हुआ था वह सब बताया। अमरशी को पूछ परछ की तो शुरू में आनाकानी कर ने लगा खेत में जाकर पुलिस ने जांच की। पास में कुआं था उसमें भी तपास की।परशोतम की लाश कुएं में से मिली तय हुआ अमरशी ने ही खून किया है।पुलिस अमरशी को पकड़ कर ले गई।
पालजीभाई राठोड़ ‘प्रेम’
(सुरेंद्रनगर गुजरात)




