Uncategorized

संयुक्त परिवार का महत्व और सुखद अनुभव  — मंजु शर्मा ‘मनस्विनी’

 

संयुक्त परिवार हमारे जमाने का एक सुखद अनुभव है। मैंने भी सब जगह संयुक्त परिवार ही देखा।
मायके में भी परदादी, दादा-दादी चाचा,बुआ सबका भरपूर प्यार दुलार मिला और आज भी मिलता है।
मैं घर में सबसे बड़ी बेटी जो थी सबको दादा-दादी की पदवी में परिवर्तित करने वाली…ससुराल में सबसे छोटी बहु रही। जो यहां भी सबने अपने स्नेह से सींचा।
गर्मी छुट्टियों में जब सारे इकट्ठे होते तो काम ज्यादा होता लेकिन मजा तो तभी आता था। संयुक्त परिवारों में जहां एक-दूसरे के प्रति ईष्र्या की भावना नहीं होती है तो वो घर स्वर्ग के समान बोला जाता था। मुझे जन्मभूमि और कर्म भूमि के ऐसे ही परिवार मिले।
सारे दिन घरों में हंसी के ठहाके गुंजते रहते थे । शाम को रोज एक घंटा लाइट जाती थी तो सब अंताक्षरी खेलने बैठ जाते थे।
कभी चिटिंग के बहाने खेलते-खेलते जोश में किसी की आवाज ऊंची हो जाती थी। तब बड़ों के स्वर डांट के रूप पड़ने पर कुछ देर का सन्नाटा छा जाता था फिर सब वैसे ही।संयुक्त परिवार हमारी सबसे बड़ी धरोहर है। जिसमें परिवार के लोगों को अपने प्रेम संबंधों को मजबूत बनाएं रखने के लिए बहुत सारे समझोते भी करने पड़ते हैं। जिसमें बड़ों का अनुशासन एक मजबूत वृक्ष की भांति होता है
जिसकी जड़ें परंपरा में गहरी होती हैं, और शाखाएँ रिश्तों की छाँव फैलाती हैं।
यहाँ हर उम्र का कोई न कोई सहारा होता है,बच्चों के खेल में हँसी होती है,बुज़ुर्गों की सीख में जीवन की दिशा,और बड़ों के अनुभव में सुरक्षा की गारंटी मिलती है। उनकी गोदी में दुलार,डांट में प्यार और अनुभवों में संस्कार जीवन को सार्थक दिशा दे जाता है।सुख हो या दुःख, हर कदम पर हाथ थामने वाला कोई न कोई होता है। त्योहार भी सब मिलकर मनाते हैं,तो दीपक की लौ और उज्ज्वल हो जाती है। रसोई की महक में माँ के हाथ का बना खाना व्यंजनों में दुगना स्वाद भर देता है। प्रेम से बना खाना, जब एक साथ परिवार के लोग खाने बैठते तब उस अपनेपन को देखकर ऐसा लगता था इससे बड़ा सुख और आनन्द क्या हो सकता है गृहस्थियों के लिए। वो यादें आज यादगार बनकर रह गई।संयुक्त परिवार का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें जिम्मेदारियाँ बँटी रहती हैं। किसी एक पर बोझ नहीं पड़ता। यदि परिवार का कोई सदस्य किसी कठिनाई से गुजर रहा हो, तो सब मिलकर उसका समाधान खोजते हैं। यही कारण है कि संयुक्त परिवार में मानसिक संतुलन और जीवन का संतोष अधिक देखने को मिलता है।आज की भागदौड़ भरी दुनिया में संयुक्त परिवार एक सशक्त सहारा है। यह हमें बाँटकर चलने, त्याग करने और आपसी सहयोग जैसे मूल्य सिखाता है। यही कारण है कि संयुक्त परिवार में रहना एक सुखद अनुभव है, जो जीवन को पूर्णता प्रदान करता है।आज का परिवेश बदल गया बच्चों को नौकरी के बाहर जाना पड़ता है। अकेले रहना पड़ता है संयुक्त परिवार से गए बच्चों को ज्यादा दिक्कतो का सामना करना पड़ता है। त्योहारों पर घर न पहुंच पाने पर वो कहीं और सम्मिलित होने की बजाए खुद में सिमटने लग जाते हैं। ये चिंता का विषय है।संयुक्त परिवार को लोग संस्कारों की पोटली कहते हैं।
जो हमें बाँटने की,सुनने की और समझने की शिक्षा देता है।
यही वह अनुभव है जो जीवन को मधुर बना देता है,जहाँ हर दिन रिश्तों में उत्सव होता है,
और हर दिल में संतोष का दीपक जलता है।

मंजु शर्मा ‘मनस्विनी’

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!