अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था की सातवीं काव्य गोष्ठी सम्पन्न

नई दिल्ली। अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था वर्ष-11 द्वारा आयोजित सातवीं मासिक काव्य गोष्ठी दिनांक 26 अक्टूबर 2025, रविवार को हिंदुस्तानी भाषा एकेडमी के तत्वावधान में अत्यंत सादगीपूर्ण किंतु श्रेष्ठ साहित्यिक आयोजन के रूप में सम्पन्न हुई। कार्यक्रम में साहित्य और फिल्म जगत की प्रतिष्ठित हस्ती प्रमोद कुमार कुश “तन्हा” मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जो विशेष रूप से मुंबई से दिल्ली पधारे थे। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सुधाकर पाठक ने की, जिन्होंने हिंदुस्तानी भाषाओं के संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। व्यंग्यकार कवि एवं लेखक विनोद पाराशर विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे, वहीं प्रसिद्ध लेखिका डॉ. दामिनी शर्मा की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
कार्यक्रम का संचालन कवयित्री राजरानी भल्ला ने किया, जिनकी आत्मीयता, मधुरता और चुलबुलापन से भरा मंच संचालन श्रोताओं को खूब भाया।
अभिव्यक्ति मंच की ओर से संजय कुमार गिरि, संगीता चौहान ‘सदफ़’, आरती वर्मा सहित अनेक साहित्यकारों ने समय से पूर्व पहुंचकर मंच व्यवस्था में सहयोग दिया, जिसके लिए संस्था ने आभार व्यक्त किया। काव्यगोष्ठी में कुल 18 कवि एवं साहित्यिक विभूतियों ने अपनी रचनाओं से वातावरण को काव्यमय बना दिया। राजकुमार श्रेष्ठ की राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रचना ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। निधि भार्गव ‘मानवी’ की सुमधुर ग़ज़लें और आत्मीय प्रस्तुति ने सबका दिल जीत लिया।
संजय कुमार गिरि की प्रभावशाली प्रस्तुति, आरती वर्मा की संवेदनशील रचनाएं और संगीता चौहान ‘सदफ़’ की ग़ज़लों ने कार्यक्रम में नई ऊँचाइयाँ जोड़ दीं। अंजू वर्मा ‘उत्साही’ मधु अरोड़ा, पुनीता सिंह, सरफराज अहमद, और इब्राहिम अल्वी की प्रस्तुतियों ने भी खूब सराहना पाई। नए कवि शशि स्वरूप पाराशर ने अपने व्यंग्य लेखन से सबका ध्यान आकर्षित किया और श्रोताओं को सोचने पर विवश कर दिया।कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष सुधाकर पाठक ने अपने वक्तव्य में कहा कि गोष्ठी की सफलता उसकी संख्या में नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता में निहित है, और सभी रचनाकारों की प्रशंसा की। अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था की यह सातवीं गोष्ठी न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार आयोजन रही, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि सच्चा साहित्य सादगी में ही श्रेष्ठता का प्रतीक होता है।




