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हमारे संस्कार, हमारी धरोहर — राजेन्द्र परिहार सैनिक

 

हम भारतीयों को पीढ़ी दर पीढ़ी मिलते रहे हैं, उच्च व आदर्श संस्कार। यही शुद्ध व पावन सनातनी धर्म
संस्कार ही हमारी सबसे बड़ी धरोहर है। संस्कृति व
संस्कारों से ही जुड़ी होती है व्यक्ति की विशिष्ट एवं
आदर्श पहचान। बड़ो का अभिवादन आदर सम्मान
और वाणी में नम्रता शिष्टता ही हमारी महान संस्कृति
के विशिष्ट गुण है। सहयोग,दान, रक्षा भाव, उदारता
ही हमारी संस्कृति के आभूषण हैं अलंकार है।

माता पिता गुरु जनों,संत जनों विद्वानों, देशभक्तों
को समुचित आदर सम्मान देना, निर्बल और स्त्री
की रक्षा करना हमारी संस्कृति के महानतम् गुण
व कर्तव्य कहलाते हैं। देश और मातृभूमि के प्रति
अगाध श्रद्धा हमारी संस्कृति की विशेषता है। यह
हिन्दू सनातन संस्कृति विशेष गुण धारक है शाश्वत
है मिटती नहीं है कभी मिटाने से,इसीलिए युगों से
अपनी अक्षुण्णता बनाए हुए है।

धर्म और संस्कृति के रक्षकों ने शीश भले कटा लिए
पर धर्म और संस्कृति पर आंच नहीं आने दी। विदेशी
शासकों ने अपनी अपनी धर्म संस्कृति थोपने की तो
बहुत कोशिशें की,,लेकिन हमारी संस्कृति की जड़ें
इतनी सुदृढ़ है कि मिटती नहीं किसी के मिटाने से।
भले ही प्रयास होते रहे मिटाने के गुजरे कई जमानों से।
हमारी समावेशी पावन संस्कृति हमारी मूल धरोहर है।

राजेन्द्र परिहार सैनिक

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