चिंतन – अपनी प्रतिभा को समझे कभी अनदेखा न करे — प्रेममणी एसलीना सिमरन नागपुर महाराष्ट्र

आज बहुत दिनो बाद अवसर मिला चिंतन और आत्ममंथन का तो बहुत अच्छा महसूस हुआ असल में एक लेखक, एक रचनाकार का जीवन तभी सार्थक होता है जब वह अपने ह्रदय की अभिव्यक्तियो को कागज में उड़ेले,
हर दिन हर पल दिल में आने वाले उबाल को अभिव्यक्त करे,
जितने अल्फाज़ बैचेन रहते है न उससे भी अधिक लेखनी बैचेन होती है,दोनो का ऐसा समागम होता है न की क्या ही कहे,
एक रचनाकार जब तक पाठक,दर्शक,शुभचिंतक, समाजसुधारक न हो न तो उसका लेखन अधूरा ही होता है,
पठन ही किसी रचना में जान डाल सकती है,
साथ ही ह्रदय के उत्तम भाव,प्रेम,गंभीरता,उत्साह,सहानुभूति,दर्द,और कई सारे भाव,
लिखने,पढ़ने की उत्सुकता,साथ ही साथ
मां शारदे का आशीर्वाद,
बहुत बार मैं लिख नही पाती फिर भी मेरे भीतर कविताएं पनपती रहती है,
विचार,चिंतन,कहानियां,
किसी विधा में लिखने के आतुर रहते है,
जब अवकाश मिलता है सब कामों से,
जो सिर्फ लिखने के लिए होता है सच कहूं तो मुझे आत्मसंतुष्टि तभी मिलती है,
मैं हर दिन हर पल शब्दो को मोती सा पिरोने के लिए वक्त से ही वक्त चुराती रहती हूं,
जितना मुझे लिखना पसंद है उससे भी अधिक मुझे पढ़ना पसंद है चाहे वो कोई सा भी विषय हो,
इसी चाह के कारण मैं हमेशा किताबो से परीक्षाओं से जुड़ी रहती हूं,
जब मेरे पास कुछ नहीं होता तब मैं किसी भाषा को सीखने का किसी भाषा में महारत हासिल करने का प्रयास करती हूं,
मुझे जब लिखने नही मिल पाता तब मेरे भीतर
भयानक उथल पुथल महसूस करती हूं,
पहले जब फोन नही थे तब मैं किताबो,कापियो में लिखती थी,तब लिखना बहुत आसान था,
आज की तरह फोन में लिखना थोड़ी पड़ता था,
आज यदि कागज में लिख दे तो प्रकाशन में समस्या आ जाती है,
त्रुटि सुधार की समस्या रहती है,
मेरे मंच पर भी मैं खुद कई बार कॉपी में लिखी रचना अस्वीकार कर देती हूं अब क्या करे समय की यही मांग है,
पहले भी शायद कॉपी पेस्ट होते होंगे लेकिन संचार के युग ने कॉपी पेस्ट बहुत ही आसान कर दिया है,
लिखते लिखते अंत में अचानक डिलीट हो जाता है,कभी सही शब्द अंकित नही हो पाते तब बहुत दुख होता है, तब और अधिक पेन कॉपी की याद आती है,
वैसे तो आजकल कागज पर कम ही लिखती हूं लेकिन कमी आज भी जरूर खलती है,
कभी स्विच ऑफ की समस्या,कभी रिचार्ज की,तो कभी बैटरी ही चली जाती है,
ऐसा लगता है मोबाइल ही कह रहे हो अब बस करो भई आराम करने दो,
असल में इस दौरान आराम की तो हमे जरूरत होती है,
जब मैने मोबाइल से लिखना चालू किया था आतुरता और उत्सुकता
मीनार पर थे,
सर और हाथो में दर्द हो जाता था, रातों की नींद बैचेन हो जाती थी,खाना पीना दुबर
हो जाता,तबियत कुछ कुछ नासाज हो जाती थी,
किसी ने कहा लिखा करो तो भूचाल ही आ गया मन में,लिखने की भूख खतम ही नही होती,
बचपन से ही लिखना रहा लेकिन कोई समझता ही नही था मुझे,
कितनी प्यारी प्यारी रचनाओं को भगवान को प्यारी करना पड़ा मुझे,कई
रद्दी के भाव चले गए,
पढ़ने के किताबो में जो छिपाकर लिखे गए थे,
कई प्रॉपर डायरी भी थी कुछ गुम हो गई,
कई रचनाकार कहते है मेरी पहली कविता ये है वो है,मैं क्या कहूं मेरे पास तो एक्सक्यूज है बस,
बस इतना ही कह सकती हूं आज से भी अधिक खूबसूरत खूबसूरत रचनाएं थी,
बहुत याद आते है मेरे खुद से जलाए गए अल्फाज़,
कई कविताएं
क्या करे कोई समझे,कोई दिशा दे,कोई बताएं तब तो जाने,
कई बार मैने सोचा ये क्या,दिन रात अक्षर अक्षर,शब्द बनते, गीत कभी कविता,कभी विचारो में ढलते तब क्या पता था साहित्य भी कोई चीज होती है,
कोई ये भी नही बताता की जो हम पढ़ने की किताबे दिन रात पढ़ते है,अखबार पढ़ते है,कविताएं,लेख,श्लोक, वेद पुराण,महाकाव्य,खंड काव्य,उपन्यास,पत्रिकाएं न जाने कितनी विधाओं में लिखे गए गीत गजल,दोहे,अभिव्यक्ति,आस पास की घटनाओं को कहानी कविता में कहना यही साहित्य साधना है,
तो हम भी जान जाते हम गलत नही है,आखिर छिपाते ही क्यों अपनी रचनाएं, जलाते ही क्यों अपनी अभिव्यक्तियां दुख तो होता ही है,
जो हमे ज्ञान होता की हम सही दिशा में है,लिखना भी कोई कला है तो हम आज न जाने कितने आगे निकलते,इस दिशा मैं और अधिक प्रयास करते,
रात रात भर जाग जाग कर कई उपन्यास,कहानियां,
कई किताबे,पत्रिकाएं,बाईबल,अखबार का तो बस नशा था पढ़ने का,
बहुत डांट मिलती थी बस पेपर लेकर बैठ जाओ काम कब करोगे?
सभी बहन भाई को पेपर पढ़ने पर यही सुनना पड़ता,
पिता जी न्यूज बहुत सुनते फिर सबको सुनाते,पेपर आज तक पढ़ते है, टी वी में न्यूज रात दिन देखते है,
उनके न्यूज सुनाने के तरीके के कारण उन्हें हम आजतक न्यूज चैनल कह बहुत हंसते रहते,
मुझमें आखिर कहां से आया होगा लेखन और पठन की चाह
शायद पिता जी से या दादा जी से भी,या शायद मां जी से,
सभी पढ़ने के बहुत शौकीन है, मां को भी अक्सर पढ़ते देखा है,वो पेपर तो नही लेकिन अन्य किताबे जरूर पढ़ती है,इनमे से बाईबल तो सबसे अधिक प्रार्थना के दौरान चाहे कोई भी वक्त हो,रात दिन कभी भी,
बहुत चिंता करती है सबकी और बहुत बाईबल पढ़ती रहती है,
आजकल मैं बिंदास लिखती हूं बिना डरे,निसंकोच,बड़ी उत्सुकता से,बड़ी बैचैनी से, और बहुत सतर्कता से की मेरी रचनाओं से किसी को नया जीवन मिले,जागृति फैले,अपने लिए खड़े होने का साहस हो,कुछ करने,समाज में जीने का शांति से रहने का अधिकार मिले,और हर परिस्थितियो से लड़ने का बल मिले,
मैं किसी भी विषय पर लिखने के लिए खुद को रोक नहीं पाती,
वैसे मेरी रचनाएं किसी भी विषय पर हो लेकिन
प्रेम,विरह,चेतना,जागृति,शांति, एकता
सहानुभूति,वात्सलय,और
कितना भी प्रयास करूं वीर रस की कविताएं लिखने से खुद को बचा नही पाती हूं
मुझे गाने का और नृत्य का बहुत शौक था किसी ने समझा नही किंतु अब इसके लिए खुद को रोकती नही मैं,
मैं ये जरूर कहना चाहूंगी की ये सब इसलिए संभव हो पाया की मुझे लोगो ने स्वीकार किया मेरी अभिलाषाओं को समझा, मैने भी इस दिशा में दिन रात एक किए,
कोई कह भी सकता है दिन भर फोन पर लगे रहते हो,
अब कोई कुछ भी कहे क्या करे हमे तो खुद को समझना है,
वर्ना आज भी मेरी स्थिति पहले सी होती मैं कुछ जान ही नहीं पाती,
लेकिन इसके लिए मुझे कई बार आज भी उलाहना का सामना करना पड़ता है,
उससे भी अधिक मैने अब जान लिया है की मैं गलत दिशा में नही हूं तो मैं इस विषय पर खुद के लिए खड़ी हो पाती हूं,
मैं यही कहना चाहती हूं कोई आपको समझे उससे पहले आप खुद को समझने का प्रयास करे,
आपके भीतर की प्रतिभा को जानने समझने का प्रयास करे और उसे आगे बढ़ाने के लिए आवाज उठाए,
अगर आप गलत नही है तो आप कभी नही रुके मुझे पता है शायद हम सभी को की ईश्वर से हमे कई सारे ईश्वरीय उपहार मिलते है जो बच्चे में बचपन से ही होता है,यह उनके माता पिता और पीढ़ियों से उनमें आता है,
जिसे हम गॉड गिफ्ट कहते है,
हां गॉड गिफ्ट प्रभु की ओर से हमे उपहार स्वरूप दिया गया ऐसा अनमोल उपहार है जो कभी खत्म नहीं होता न ही कभी गलत हो सकता है,
आपने देखा होगा लोग किसी प्रतिभा के लिए तराशे जाते है किंतु आपको स्वयं ईश्वर ने तराश कर भेजा होता है,
इसलिए आपने भीतर की प्रतिभा को समझे,चाहे आप डॉक्टर,इंजीनियर बने चाहे कलेक्टर चाहे जो भी किंतु आपकी प्रतिभा से आपको
आत्मसंतुष्टि मिलती है,
मैं यह कभी नहीं कहूंगी की आप पढ़ाई नही करे,कुछ पद हासिल न करे ,किंतु यह जरूर कहूंगी जिन प्रतिभा से जिन अच्छे कामों से आपको खुशी और शांति मिलती है उसमे भी महारत जरूर हासिल करे उसे कभी अनदेखा न करे,
हां बहुत लोग हमारे विरोधी हो सकते है किंतु यह जरूर जान ले की
“यदि ईश्वर हमारे साथ है तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है”
बाईबल के पवित्र वचन के अनुसार।
आप सभी को अग्रिम बधाई ढेरो शुभकामनाएं।
प्रेममणी एसलीना सिमरन
नागपुर महाराष्ट्र



