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मेरी अपनी कमाई — अलका गर्ग, गुरुग्राम

 

पापा की अच्छी नौकरी होने की वजह से घर बाहर के हरेक काम के लिए नौकर मिले हुए थे।मुझे बड़ी होते देख हर माँ की तरह मेरी माँ भी चिंता हुई कि लड़की पढ़ाई और खेलकूद में बहुत अच्छी है पर घर का काम भी तो ज़रूर आना चाहिए।तो शुरुआत कैसे कराई जाए लग गईं मौक़े की तलाश में।
मुझे फ़ोटो खींचने का बहुत शौक़ था तो मैं कई बार कैमरे की माँग कर चुकी थी।माँ ने इसी बात का लाभ उठाया और बोलीं बोर्ड की परीक्षा के बाद लंबी छुट्टी में तुम अगर घर के छोटे छोटे काम करोगी तो एक महीने बाद मैं तुम्हें भी सभी की तरह सेलरी दूँगी।पर दो चार दिन नहीं पूरे महीने।मुझे लगा सुझाव अच्छा है फिर अपने पैसे से कैमरा ख़रीद सकूँगी।
मैंने स्त्री करना,बिस्तर बनाना,जूते पॉलिश करना,पौधों में पानी देना,खाने की टेबल लगाना उठाना,फैला हुआ घर ठीक करना शुरू कर जो काम नौकर करते थे।पेंटिंग में अच्छी होने के कारण पड़ोस की एक आंटी के अनुरोध पर उनकी बेटी को प्रतियोगिता के कारण वह भी सिखाने लगी।छुट्टियाँ बहुत मज़े में कट रही थी जबकि पहले बोर होती थी।
एक महीने बाद मम्मी ने मुझे तीन सौ रुपये दिये।नानी भी आईं हुई थीं उन्होंने मुझे पहली बार इतना काम करते देख निहाल हो कर दो सौ दिये दिये और आंटी ने भी बहुत ज़िद करके मेरी मेहनत का फल दो सौ रुपये दिये।सुन कर पापा ने भी तीन सौ पकड़ाये।ये हज़ार रुपये ..मेरी मेहनत की पहली कमाई..मैं तो हवा में उड़ने लगी।अपनी कमाई से मैंने कैमरा ख़रीदा और बची छुट्टियों में नैनीताल घूमने गई ख़ूब फ़ोटोग्राफ़ी की।
मेरी इस ट्रेनिंग से मुझे काम करने की आदत पड़ी जो ज़िंदगी भर बहुत काम आई।बाद में मैंने अपनी बेटियों के साथ भी यही नुस्ख़ा अपनाया।

अलका गर्ग, गुरुग्राम

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