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उम्मीद — नीलम सोनी ( ब्यावर राजस्थान )

 

मेरी हर टूटी उम्मीद मुझे कृष्ण से जोड़ती है। जब रात दिन दुनिया में स्थिर नहीं है।कोई मौसम स्थिर नहीं है। इंसान की जिंदगी में कुछ पल कुछ वक्त ऐसा आता।इंसान पूरा टूट जाता है। उसकी जिंदगी बिखर जाती है।जिंदगी में ऐसे पल भी आ जाते।उसे आगे पीछे चारों तरफ कुछ नहीं दिखता। जीने की इच्छा तक खत्म हो जाती।कभी कभी इंसान थक जाता है।दर्द सहते सहते, सब्र करते करते।उम्मीद रखते रखते,रिश्ते निभाते निभाते। अपनो को मनाते। अब अपने दूर चले जाते। सही होते हुए भी जिंदगी में सब गलत होता रहता है।जिसे जिंदगी में सबसे ज्यादा प्यार करता वो भी दूर चला जाता।चारों तरफ सभी अपने होते हुए भी। लाखो की भीड़ में अकेला महसूस करता ।उसका कोई नहीं है दुनिया में।मरने का मन करता है।बस अपने अंदर से एक आवाज आती है। सब अच्छा होगा। बस एक उम्मीद रहती। दुनिया उम्मीद तोड़ सकती है। पर दुनिया बनाने वाला नहीं।अपनी उम्मीद खुद से रखो।इंसान कब बदल जाए ।कोई भरोसा नहीं। सुना है उम्मीद पे जीता है जमाना। क्या करे जिसकी कोई उम्मीद ही ना हो। जब जिंदगी में चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा हो तो एक उम्मीद की रोशनी की किरण दिखाई देती है। मत हो हताश वो मंजर भी आएगा।जिसने आज तुझे ठुकराया।वो भी एक दिन तेरे पास चल के आएगा
नीलम सोनी ( ब्यावर राजस्थान )

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