श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन भगवान कपिल व दत्तात्रेय अवतार का हुआ विस्तृत वर्णन

समालखा पानीपत हरियाणा। लोकेश झा।
बड़ा समालखा स्थित श्री विश्वनाथ संतोषी माता मंदिर में चल रहे 29वें वार्षिक उत्सव के अंतर्गत श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथा वाचन करते हुए श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर संतोषी माता जी ने भगवान कपिल के जन्म, भगवान दत्तात्रेय के अवतार और माता अनसूया के पावन चरित्र का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।
कथा के दौरान संतोषी माता जी ने कहा कि गृहस्थ का कर्तव्य है कि वह याचक को कभी खाली हाथ न लौटाए, क्योंकि दान और भिक्षा से ही जीवन में पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने माता अनसूया का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार माता अनसूया ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश को छह माह के शिशु रूप में भिक्षा देकर स्तनपान कराया था, जिसके बाद तीनों देवों ने उन्हें मां का दर्जा दिया।
महामंडलेश्वर ने उदाहरण देते हुए कहा कि हर कार्य शक्ति से नहीं, समझ से होता है। रेत में मिली चीनी को चींटी अलग कर सकती है, लेकिन हाथी नहीं—यह अध्यात्म की गहराई को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जिसे आध्यात्मिक समझ आ जाती है, उसका जीवन भवसागर से पार हो जाता है।
भगवान शिव पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जो शंकर भगवान के प्रति श्रद्धा नहीं रखते, वे अज्ञान के कारण पशु समान होते हैं, लेकिन भगवान शिव इतने दयालु हैं कि वे अज्ञानियों पर भी कृपा करते हैं, इसी कारण उन्हें पशुपतिनाथ कहा जाता है।
इस अवसर पर मंदिर परिसर में मंच को कमल के पुष्प के आकार में भव्य रूप से सजाया गया, जिस पर स्वयं संतोषी माता जी विराजमान होकर कथा कर रही थीं। कार्यक्रम में पवन गर्ग, राजेश जैन, डॉक्टर नरेश गुलाटी, नारायण दास, सुधीर गुप्ता, इंद्रलाल कुमार, राजकुमार गर्ग, रघुनाथ मंदिर के अध्यक्ष प्रदुमन गुल्यानी, पूनम गोयल, शमी नंदवानी, मीना गर्ग सहित अनेक श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
श्रीमद् भागवत कथा के उपरांत जयपुर से आए प्रसिद्ध भजन गायक नवीन शर्मा एवं उनकी टीम ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी, जिन पर श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो गए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।




