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पंचतत्व पूजन के साथ मनाया जन्मदिन संस्कार महोत्सव एकादशी पर वैदिक विधि से मनाया जन्मदिन, पौधारोपण का लिया संकल्प

 

जयपुर। चैत्र कृष्ण एकादशी पर गोविंद देव जी मंदिर के सत्संग भवन में जन्मदिन को भारतीय संस्कृति के अनुरूप मनाने की परंपरा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में मंदिर के महंत अंजन कुमार गोस्वामी महाराज के सान्निध्य में सत्संग भवन में “जन्मदिन संस्कार महोत्सव” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मार्च माह में जन्मदिन वाले एक दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं ने वैदिक विधि-विधान से अपना जन्मदिन मनाकर समाज में सांस्कृतिक जागरण का संदेश दिया।
महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने पृथ्वी, अग्नि, वायु, जल और आकाश जैसे पंचतत्वों का पूजन किया तथा दीप प्रज्ज्वलन और हवन के माध्यम से अपने जीवन को संस्कारित करने का संकल्प लिया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए इस कार्यक्रम में जन्मदिन को केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और संस्कार का पर्व बनाने का संदेश दिया गया।
आचार्य पीठ से वर्षा गुप्ता ने कहा कि जन्मदिन केवल केक काटने का अवसर नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण, कृतज्ञता और जीवन में सद्गुणों को अपनाने का दिन है। जिस प्रकार हम भगवान और महापुरुषों की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं, उसी प्रकार हमें अपना और अपने परिजनों का जन्मदिन भी भारतीय संस्कृति के अनुरूप मनाना चाहिए।
गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी के सह-व्यवस्थापक मणिशंकर पाटीदार के निर्देशन में भक्त भूषण वर्मा, नीलम वर्मा, वर्षा गुप्ता एवं सुमन शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ संपन्न कराया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भविष्य में दीप प्रज्ज्वलित कर जन्मदिन मनाने और भारतीय संस्कृति की इस परंपरा को समाज में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान कैलाश चंद्र अग्रवाल, रमेश चंद्र अग्रवाल सहित अन्य वरिष्ठजनों ने पुष्पवर्षा कर जन्मदिन मना रहे श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। एकादशी के अवसर पर गीता पाठ का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया।

जन्मदिन पर लिया प्रकृति संरक्षण का संकल्प

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महोत्सव में जिन श्रद्धालुओं का जन्मदिन था, उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में जन्मदिन को भारतीय संस्कृति के अनुसार मनाएंगे तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रत्येक वर्ष कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएंगे, ताकि समाज में संस्कारों के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी प्रसारित हो सके।

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