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मां लापरवाह कैसे — सीमा त्रिपाठी लखनऊ उत्तर प्रदेश

 

हां जी बच्चों का कमरा बिखरा तो मां लापरवाह क्योंकि ससुराल नाम के घर में कुछ भी गलत हो तो लापरवाह बच्चों की मां यानी कि बहु को ही ठहराया जाता है भले ही वह अपना ध्यान ना रखे यहां तक कि खाना खाने में भी उसकी रुचि समाप्त हो गई हो और इसके अलावा बीमार भी हो कभी पति के काम सास और ससुर उसके बाद उनके रिश्तेदारों की सेवा में कोई कमी नहीं होनी चाहिए अब इस तरह के जीवन में कोई मां चाहते हुए भी अपने बच्चों को अपने तरीके से कुछ सिखा नही सकती उसके पास समय ही नहीं है उसके बच्चों के लिए इस स्थिति में बच्चों को जो व्यवस्था समझ में आती है वही करते है जैसे सुबह छ: या सात बजे स्कूल या कॉलेज जाना है तो वो घर में झाडू पोछा लगा के नही जायेंगे वह नहा धोकर नाश्ता कर के चले जायेंगे कभी देर होने पर हो सकता है नहा भी ना पाए ऐसे में ये कहना ठीक होगा कि मां लापरवाह है मां कहां से आ गई बीच में मां तो सुबह ससुर की चाय दुबारा सास की चाय तीसरी बार पति की चाय खाने की तैयारी पूजा घर की सफाई बच्चो का टिफिन कपड़े प्रेस करना बच्चों को बस तक छोड़ने जाना वापस फिर सास ससुर पति का नाश्ता फिर खाना सबकी दवाई पानी का इंतजाम इस बीच अगर उसके शरीर के किसी अंग में दर्द हो तो नही कहती लेकिन काम करती रहती दोपहर में बच्चे स्कूल से आकर हाथ मुंह धोकर खाना खाकर सो ही जायेंगे तो घर के सभी काम निबटाने के बाद समय मिला तो बच्चों के साथ बैठकर कुछ बात कर सकती लेकिन ऐसा नहीं है बच्चे बहुत समझदार होते है अपनी आवयश्यकता अनुसार तो कर ही लेते है फिर भी अगर कुछ रह जाता है और ये कहा जाय कि मां लापरवाह है मै इस बात से सहमत नही हूं क्योंकि इसके बाद कहने सुनने को कुछ नही रह जाता तो आज के प्रश्न पर मेरा यही विचार है बच्चों के लिए मां कभी लापरवाह नही होती लेकिन कई बार परिस्थितियां उसे असमर्थ बना देती है।

सीमा त्रिपाठी
लखनऊ उत्तर प्रदेश

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