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हर बार क्यों अनचाही रह जाती हैं बेटियाँ ? _ डॉ निर्मला शर्मा उदयपुर राजस्थान

 

नारी सशक्तिकरण की कई योजनाएँ हमारे देश में चल रही हैं बावजूद उसके भी नारी उतनी सशक्त नहीं हो पाई है, जितने दावे किए जाते हैं। इस बात को जानने के लिए चलिए मैं आपको ले चलती हूँ आदिवासी अंचल में जहाँ बेटियों आज भी दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।

लिव -इन रिलेशनशिप

उदयपुर के आसपास कुछ ऐसे आदिवासी अंचल हैं जहाँ लिव -इन -रिलेशन का चलन है, आज से नहीं कई पीढ़ियों से इन लोगों में विवाह बाद में होता है, बच्चे पहले पैदा हो जाते हैं। जब ये लोग लिव -इन में रहते हैं तब इन पर किसी भी तरह का कोई बंधन या दबाव नहीं होता। पूरी तरह से स्वतंत्र आजाद होते हैं। जब किसी लड़की को कोई दूसरा आदमी या आदमी को दूसरी लड़की पसंद आ जाती है तो वे पहले वाले को छोड़कर दूसरे वाले के साथ रहना शुरू कर देते हैं। दो-तीन बच्चे पैदा करने के बाद भी वे दूसरे के साथ लिव -इन में रहने के लिए चले जाते हैं। माँ के चले जाने के बाद इन बच्चों के साथ बड़ी ज्यादती होती हैं। लिव- इन जैसे रिश्तों में स्वतंत्रता है, विकल्प हैं, लेकिन जब ये रिश्ते टूटते हैं तो सबसे बड़ी चोट इन नन्हे बच्चों पर पड़ती है, जो इन फैसलों में कभी शामिल ही नहीं होते। इन बच्चों को न छोड़ने वाली माँ अपनाती है न आने वाली नई माँ। ये अनाथ की तरह इधर-उधर भटकते- भटकते बड़े होते हैं।

अगर इन बच्चों में बेटा है तो उसको पिता या उस पिता के खानदान में कोई भी रखने के लिए तैयार हो जाता है लेकिन यदि बेटी है तो उस बेटी को कोई नहीं रखना चाहते । तब इस तरह की दुर्भाग्यशाली बेटियों को रखने की जिम्मेदारी आ जाती है -उनके ननिहाल पक्ष पर ननिहाल में भी कौन उनकी नानी। ऐसी बेटियों को अक्सर उनकी नानी ही रखती हैं। जब नानी इस तरह की बेटियों को रखती है तो अक्सर उन घरों में कलह और झगड़े होते हैं क्योंकि वहाँ उस घर की बहुएँ इन बेटियों को रखना नहीं चाहती। ये बेटियाँ हमेशा असुरक्षा, उपेक्षा और अस्वीकार का सामना करती रहती हैं।

बहुत करीब से इन बच्चों के जीवन को देखने वाले एक व्यक्ति ने मुझे बताया कि किस तरह से ये बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते जाते हैं, वैसे-वैसे गलत कामों में लिप्त होने लगते हैं। जो बेटियाँ इतना तिरस्कार झेलती है वे भी बड़ी होकर उस मार्ग पर चलती है, जिन पर उनकी माँ, बड़ी बहन, बुआएँ चल रही होती हैं । सरकार चाहे कितनी भी पढ़ाई की सुविधा कर दे, मुफ्त शिक्षा देते किंतु फिर भी ये बच्चे नहीं पढ़ते। आठवीं तक की शिक्षा जैसे तैसे प्राप्त कर कभी अहमदाबाद, कभी पुणे कमाने के लिए निकल जाते हैं और इस तरह युवावस्था में जो लड़कियाँ घर से निकाल कर बाहर जाती हैं, उनकी देखरेख करने वाला कोई नहीं होता, उन्हें कोई पूछने वाला नहीं होता तब वे कभी किसी ऐसे दलाल के (खासतौर से लड़कियाँ ) हाथ चढ़ जाती हैं जहाँ उनकी तस्करी शुरू हो जाती है या कभी उस‌ दलाल के गिरोह के हाथ आ जाती है जहाँ विवाह का झांसा देकर बार-बार उसका विवाह कर बहुत सारे पैसे कमाने का एक जरिया बना दी जाती हैं और कभी-कभी ऐसे व्यक्ति के साथ फंस जाती है जहाँ उसका शारीरिक, मानसिक शोषण होने के साथ-साथ रोज उसके साथ बलात्कार होता है। एक बार नहीं दिन में कई-कई बार होता है। आए दिन हम इस तरह की घटनाओं को अखबारों में भी पढ़ते हैं। सोचिए, कल्पना कीजिए कि अनजाने में भी कभी किसी की जरा सी अंगुली टच हो जाए तो हम बहुत सहज महसूस करते हैं तो फिर बिना मन से किसी के साथ बार-बार इस तरह के संबंध उसके मन पर कितने गहरे घाव करते होंगे। कल्पना से ही रूह काँप जाती है, रोंगटे खड़े होने लगते हैं, है न ?

भले ही हमारा देश कितना ही विकसित हो जाए, अर्थव्यवस्था पहले नंबर पर आ जाए, नारी सशक्तिकरण की बातें गुंज बनकर चहुँओर फैल जाए फिर भी स्त्रियों की दशा समाज में पहले जैसी थी, जस की तस आज भी बनी हुई है। हमारा समाज पुरुष प्रधान समाज है । इस समाज में बेटा सबको चाहिए, बेटी किसी को नहीं। पढ़ा -लिखा कितना ही उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति क्यों न हो उसकी सोच यही होती है कि बेटा चाहिए। भले ही इन बेटों को दुनिया में लाने वाली एक लड़की ही होती है फिर भी कोई उन्हें नहीं चाहता। कोई उन्हें प्रेम नहीं करता। आखिर कब तक इस तरह के रिश्तों की भेंट बेटियाँ चढ़ती रहेगी।
कुछ लोग हमेशा यह कहते रहते हैं कि आजकल की लड़कियाँ इस तरह की हो गई। उदाहरण नहीं दूँगी आप जानते ही हैं लेकिन सभी लड़कियाँ एक जैसे नहीं होती। समाज की एक-दो प्रतिशत लड़कियाँ है जो अपने पति के साथ और ससुराल वालों के साथ भी गलत करती है। कुछ को अच्छे पति और अच्छे ससुराल मिल जाते हैं। किंतु मैं अभी भी यही कहूंगी 80% लड़कियाँ बहुत कष्टों के साथ अपना जीवन जीती है।

कानून ने बहुत आजादी दी है लेकिन क्या यह आजादी सही मायने में मिली है या फिर इसका दुरुपयोग ही हो रहा है ? लिविंग से पैदा हुई इन बेटियों के बारे में सोचते हुए इन प्रश्नों के जवाब खोजिएगा आपको क्या जवाब मिलता है ? मेरे साथ साझा ज़रूर कीजिएगा।
डॉ निर्मला शर्मा उदयपुर राजस्थान

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