लोग क्या कहेंगे/कहानी – सुनीता तिवारी

यह क्या बेटी,तुम बिना गहनों के ही मायके आ गयीं।
चार लोग बातें बनाएंगे।
कैसे भुख्खड़ घर में बेटी ब्याही है।
कांच की चूड़ियां पहनकर आ गई, दो सोने की चूड़ियां भी नहीं हाथ में।
रूही ने तुरंत अपनी सासू माँ को कॉल किया।
माँ आप तो बाद में शादी में आएंगी, तब तक यहाँ पर मुझे बिना गहनों के देख सभी बातें बना रहे हैं।
मेरे गहने कल रोहन से भेज दीजिये।
अगले दिन रुही ससुराल से आये गहने पहन कर काम करने लगी।
रीता भाभी ने कहा घर में कौन तुम्हारे गहने देख रहा?
जानती हूँ बड़े घर ब्याही हो।
उतार कर रख लो ,बाद में ही पहन लेना,अभी से खराब ही हो जाएंगे।
ज्योहीँ रुही ने गहने उतारे, दिल्ली वाली मौसी जी आ गईं।
अरे रुही,शादी में तो बहुत चढ़ावा दिखाया ससुराल वालों ने।
बाद में पूरा रख लिया क्या?
इतने हल्के फुल्के गहने पहने हो।
ज्योहीँ रुही ने फिर से गहने पहनने चाहे तब तक चाची आ गयी।
यह क्या गहनों की दुकान लगा रखी है तुमने।
इसी घर से विदा हुई हो मायके में क्या अकड़ दिखाना।
पूरी अटैची फैलाकर रखी है।
इस प्रकार की बातों से हर एक को दो चार होना पड़ता है।
लोग क्या कहेंगे यही सोच कर लोग अपने मन से आम इंसान जी नहीं पाते।
आप अपने मन की करिये।
आप चाहे जो भी कर लो लोग आलोचना करना,रोकना,टोकना बंद नहीं करेंगे लेलकिन हमें आगे बढ़ना है अपनी मंजिल तक पहुंचना है तो किसी के बहकावे में नहीं आना है।
जितने मुँह उतनी ही बातें।
हमें सिर्फ अपने सपनों की परवाह करनी है उसके लिए जी जान से जुट जाना है।
लोग तो उल्टा,सीधा,घुमाकर,
ईर्ष्या भाव से, हर तरह से नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं।
सुनीता तिवारी




