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लोकतंत्र — कविता साव

आज 15 सितंबर का दिन हमारे इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आज के दिन हम अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाते हैं। लोकतंत्र हर व्यक्ति को
अपनी बात कहने,अपने प्रतिनिधि का मनोनयन करने एवं
न्याय की अपेक्षा का अधिकार देता है। इस अनमोल प्रणाली के
सम्मान में हर वर्ष 15 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाया जाता है।
लोकतंत्र का शाब्दिक अर्थ होता है _ “जनता का शासन, जनता के द्वारा,जनता के लिए।”
इसमें हर व्यक्ति को समान अधिकार प्राप्त होता है,फिर चाहे वो किसी भी जाति,धर्म,लिंग या आर्थिक वर्ग से ही क्यों न संबंधित हो। लोकतंत्र हमें न केवल मतदान का अधिकार देता है बल्कि सरकार की जवाबदेही तय करने का भी अवसर प्रदान करता है।
8 नवम्बर 2027को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित किया,जिसमें यह निर्णय लिया गया कि हर वर्ष 15 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाया जाएगा। सर्वप्रथम यह दिवस 15 सितंबर 2028 को मनाया गया।
लोकतंत्र मानवाधिकारों के साथ ही स्वतंत्रता,न्याय और समानता का अग्रणी है।यह शांति ,विकास और साकारात्मक परिवर्तन का माध्यम भी है।परन्तु
आज लोकतंत्र एक शक्तिशाली व्यवस्था होते हुए भी कई चुनौतियों से जूझ रहा है। जैसे_ सूचना का दुरुपयोग,असमानता, भ्रष्टाचार ,आतंकवादऔर लोकतांत्रिक संस्थानों पर विश्वास की कमी।
इनसे निपटने के लिए जरूरी है कि हम लोकतंत्र को मात्र मतदान तक ही सीमित न रखकर कुछ आगे की सोचें,संवाद और सहभागिता का हिस्सा बनें।
लोकतंत्र दिवस मात्र एक दिन नहीं,बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र की रक्षा करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं,अपितु यह हर नागरिक का
परम कर्त्तव्य है।हम जितना अधिक सक्रिय ,जागरूक और उत्तरदायी होंगे,हमारा लोकतंत्र उतना ही अधिक मजबूत ,सशक्त होगा।
कविता साव
पश्चिम बंगाल

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