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संस्मरण: मेरी धार्मिक यात्रा — पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’

 

मोढेरा के सूर्य मंदिर, गुजरात। गुजरात में कई धार्मिक स्थल है।जिनमें सोमनाथ,द्वारका,
अक्षरधाम,अंबाजी,
पालीताणा और गिरनार प्रमुख हैं।हिंदू,जैन और अन्य धर्मों के महत्वपूर्ण केंद्र हैं और अपनी भव्य वास्तुकला और आध्यात्मिकता महत्व के लिए जाने जाते हैं।सोमनाथ मंदिर प्रभास पाटन भगवान शिव को समर्पित ज्योतिर्लिंगों में से पहला यह गुजरात के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण चार धामों में से एक है।अक्षरधाम मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय का एक भव्य मंदिर सांस्कृतिक प्रदर्शनियों के लिए जाना जाता है।अंबाजी मंदिर शक्तिपीठों में से एक देवी अंबा को समर्पित है।पालीताणा जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल जहां शत्रुंजय पहाड़ियों पर कई मंदिर हैं। गिरनार जूनागढ़ के पास एक पहाड़ी क्षेत्र जहां कई हिंदू और जैन मंदिर जैसे नेमिनाथ मंदिर स्थित हैं। खेड़ा में डाकोर रणछोड़राय मंदिर भगवान कृष्ण का प्रसिद्ध मंदिर है।भालका तीर्थं सोमनाथ के पास जहाँ भगवान कृष्ण ने अपने नश्वर शरीर का त्याग किया था। साबरमती आश्रम अहमदाबाद महात्मा गांधी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थान है। जामा मस्जिद अहमदाबाद की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है। ये स्थल गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को दर्शाते हैं।गुजरात के बड़े शहर वडोदरा को सांस्कृतिक राजधानी के नाम से भी जाना जाता है।नील कंठधाम की बात ही निराली है। स्वामीनारायण गुरुकुल राजकोट द्वारा बनवाया गया है। नर्मदा नदी के किनारे बना यह मंदिर अपनी विशालता के लिए प्रसिद्ध है।मंदिर की वास्तुकला देखने लायक है।यह मंदिर हजारों श्रद्धालुओं को अपनी और आकर्षित करता है।गुजरात में कई यात्राधाम है।वैसे तो गुजरात में मंदिरों की कोई कभी नहीं है, भरमार है लेकिन हमने जो मोढेरा सूर्य मंदिर की धार्मिक यात्रा की वह बहुत ही निराली थी।इन सभी धार्मिक तीर्थ स्थलों मे मोढेरा का सूर्य मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।विशाल धार्मिक परिसर महादेव की मूर्ति स्थित है।खास बात ये है मंदिर ऐसे बनवाया गया है कि सूर्य की पहली किरण मंदिर के मंदिर में महादेव के मुख पर पड़ती है। यह नजारा देखने लायक होता है।आज भी जब मैं गुजरात के धार्मिक तीर्थ स्थलों को याद करता हूं तो मोढेरा का सूर्य मंदिर का मुझे संस्मरण होने लगता है। यह मेरी यादगार तीर्थ यात्रा है।

पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’
( सुरेंद्रनगर- गुजरात)

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