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बरसात की वो रात  — सुनीता तिवारी संस्मरण

संस्मरण

बारिश का मौसम था तेज पानी बरस रहा था घर में सभी सोए हुए थे रात में ठंड के कारण नींद खुल गयी।
सोचा कि रसोई में जाकर पानी पी आऊँ
ज्योहीं पैर नीचे रखा वह डूब गया।
ध्यान से देखा पूरे घर में घुटनों तक पानी भरा हुआ था।
जल्दी से पति और तीनों बच्चों को जगाया।
घर के अंदर बहुत से सामान बह रहे थे।
सिलेंडर पानी में लेटा हुआ था।
नर्मदा नदी उफान पर होने से घर में पानी घुसता आ रहा था।
यह तो समझ में आ गया ताकि सब कुछ गीला हो गया है।
बारिश थमने पर ही देखेंगे,अभी तो जान बचाएं।
घर को यूँही छोड़कर धीरे धीरे हम पांचों
मकान मालिक के घर चले गए जो कि उसी बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर पर रहते थे।
पानी बंद होने का नाम नहीं ले रहा था।
मेरे घर में आठ फिट पानी भर गया।
मैंने ईश्वर को धन्यवाद दिया कि समय रहते आँख खुल गयी नहीं तो सब डूब जाते।
सुबह पानी उतरने पर सब कुछ गीला देख मुझे रोना आ गया।
समझ ही नहीं आ रहा था कि कहाँ से काम शुरू करूँ।
ऐसी थी वो बरसात की भयावह रात।
उसके बाद से तो कभी बरसात में जबलपुर जाने का मन ही नहीं होता।
बरसात मेरी 12 वर्ष की गृहस्थी उजाड़ गयी थी।

सुनीता तिवारी

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