कविताओं और पारिवारिक आत्मीयता के बीच हुआ “प्रेमायण” व “हूक उठे जियरा” का भव्य लोकार्पण

इटावा। कविता, संस्कार और पारिवारिक स्नेह की अनुपम छटा के बीच देश के सुप्रसिद्ध गीतकार डॉ. राजीव “राज” एवं उनके पूज्य पिताजी, इटावा शहर के प्रसिद्ध लोकगीतकार व अनेक खंडकाव्यों के रचनाकार आदरणीय प्रेम बाबू “प्रेम” जी की हीरक जयंती तथा डॉ. राजीव “राज” के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित प्रेमोत्सव भावनाओं और साहित्यिक गरिमा का अद्भुत संगम बन गया। इसी अवसर पर काव्य संग्रह “प्रेमायण” एवं “हूक उठे जियरा” का लोकार्पण किया गया।
इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब साहित्य के साथ पारिवारिक अपनत्व और संस्कार जुड़ते हैं, तो वह क्षण स्मरणीय बन जाता है। एक पुत्र द्वारा अपने पिता के सम्मान में आयोजित यह समारोह न केवल पारिवारिक गर्व का विषय बना, बल्कि साहित्य प्रेमियों के लिए भी प्रेरणादायी रहा।
कार्यक्रम में शहर की अनेक नामचीन हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कवियों द्वारा प्रस्तुत विशुद्ध काव्य पाठ और आशीर्वचनों ने पूरे वातावरण को माँ सरस्वती के प्रसाद से आलोकित कर दिया। मंचासीन कवियों में डॉ. विष्णु सक्सेना, डॉ. सुरेश अवस्थी, डॉ. प्रवीण शुक्ल, डॉ. कीर्ति काले, शबीना अदीब, डॉ. बलराम सरस, डॉ. सोनरूपा विशाल, कविता तिवारी, प्रियांशु गजेंद्र, डॉ. राजीव “राज”, पी. के. आज़ाद, योगी सूर्यनाथ सहित अनेक प्रतिष्ठित रचनाकार शामिल रहे। इस अवसर पर उपस्थित कवियों को भी काव्यपाठ का सौभाग्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की विशेषता पारिवारिक स्नेह और आतिथ्य की वह भावना रही, जिसने सभी अतिथियों को भावुक कर दिया। आयोजन में रिश्तों की गर्माहट, बड़ों का आशीर्वाद और पीहर का लाड़—सब कुछ एक ही आँगन में सजीव हो उठा। समारोह के अंत में आयोजक परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए साहित्यकारों ने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्य को केवल मंच नहीं देते, बल्कि मानवीय मूल्यों और रिश्तों को भी मजबूती प्रदान करते हैं।माता-पिता को सादर प्रणाम एवं प्रेम बाबू “प्रेम” जी को हीरक जयंती की हार्दिक बधाई देते हुए उपस्थित जनों ने इस साहित्यिक एवं पारिवारिक उत्सव को अविस्मरणीय बताया।




