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एहसास — सीमा शुक्ला चांद

 

लक्ष्मीपुर मध्यप्रदेश का एक छोटा सा जिला जहां के एक गांव चिन्तापुर में एक बालक चिन्तामणी अपने परिवार के साथ निवास करता था। वह अपने परिवार का सबसे छोटा बालक था। उसके दो बड़े भाई थे जो खराब संगति के कारण बस अपनी मौज में मस्त रहते थे। चिन्तामणी के पिता अपने छोटे बालक पर थोड़े सख्त थे वो चाहते थे उनका ये बालक परिवार के बारे में सैचे संयमित रहे। पर बालक मन को ये सख्ती कभी भांति नहीं । लक्ष्मीपुर से एक युवती रेखा बाइस तेईस वर्ष की चिन्तापुर के हाई स्कूल में पढ़ाने आया करती यंही चिन्तामणी तथा रेखा की मुलाकात शिक्षक और विद्यार्थी के रूप में हुई। चिन्तामणी वाला के अन्य बालकों से कुछ अलग था उसने अपने बचपने को खुद में संभाल रक्खा था। बालकपन में वो अपनी शिक्षिका रेखा को दिल्ली कहकर बुलाता था। रेखा भी एक हंसमुख मिलनसार युवती थी वो भी इस बच्चे को स्नेह से अपने ही बालक की तरह दुलारती थी। मजे की बात यह थी की रेखा अविवाहित थी और इन दोनों के मध्य लगभग आठ वर्षों का अंतराल था। पढ़ते पढ़ाते रेखा और चिन्तामणी दोनों ही एक दूसरे को बहुत गहराई से समझने लगे। रेखा को एहसास ही नहीं हुआ अब यह बालक उसके मन में ममता का बीज रोप गया। उधर चिन्तामणी भी अपनी इस दिदी को अपनी मां की भांति स्नेह देने लगा। अपनी हर अच्छी बुरी बातें वे दोनों एक दूसरे को बताने लगे। एक दूसरे पर अपना हक जताने लगे। समय बितता रहा और इन दोनों खास
नेहा बढ़ता रहा। एक वक्त किसी परीक्षा के लिए चिन्तामणी को बाहर गांव कोल्हापुर जाना था तो रेखा चिन्तामणी और रेखा की मां तीनों कोल्हापुर चल दिए। वहां रेखा और चिन्तामणी ने अपनी परीक्षाएं दि और वे सभी माता के दर्शन को निकल पड़े। जब रेखा और चिन्तामणी माता के दर्शन कर रहे थे तभी दोनों के हृदय में कोई भाव जोरों से पनप रहा था। रात हो चुकी थी और उनकी वापसी की गाड़ी दूसरे दिन की थी। तो रेखा रेखा की मां और चिन्तामणी एक ही कमरे में वहां रूक गए। जब सुबह वे वापस मंदिर गए तब रेखा के मन में उमड़ी ममता ने चिन्तामणी का माथा चूमकर उसे अपनू हृदय से एक छोटे से बालक की भांति लगा लिया। मातारानी के सामने उस दिन दोनों के मन में बस एक ही भाव था ममता का चिन्तामणी अपनी इस दिदी को अपनी मां कीक्षभा़ति और रेखा अपने इस बालक को छोटे से बच्चे की भांति अपना स्नेह प्रदान कर रही थी। जाने ईश्वर नू यह कृपया बंधन बांधा था की एक अविवाहित युवती के मन में अपने से आठ वर्ष छोटे बालक के लिए ममता उत्पन्न हुई और वहीं भाव उस बालक के मन में भी उत्पन्न हुआ रक्त से संबंधित ना होकर भी ये दोनों अपने इस रिश्ते को हर परिस्थिति में निभाते रहे क्रमश:
सीमा शुक्ला चांद

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