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नागरी प्रचारिणी सभा देवरिया नागरी मासिक काव्य गोष्ठी सम्पन्न

नागरी प्रचारिणी सभा देवरिया में विगत 28 वर्षों से अनवरत चल रही पहले द्वितीय शनिवारीय अब द्वितीय रविवारीय मासिक नागरी काव्य गोष्ठीआज विश्व भोजपुरी सम्मलेन के अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव भाषा विज्ञानी डॉ सुधाकर तिवारी जी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ गीतकार दयाशंकर कुशवाहा की वाणी वन्दना `जय जय जय हे हंस वाहिनी` के साथ शुरू हुई। विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय सचिव डा. अपूर्व नारायण तिवारी (वाराणसी) का सम्मान सभा के पदाधिकारियों द्वारा अंगवस्त्र माला और `नागरी काव्य देहरी`प्रदान कर किया गया।
इसके बाद गीतकार कवि रमेश सिंह दीपक ने `प्यार बाजार में नीलाम करब त बदनाम हो जाई। प्यार में जे धोखा करे उ कइसे मन मीत हो जाई` गीत सुनाकर सबको आह्लादित कर दिया। आगे नित्यानंद आनन्द ने `भोजपुरी सान ह आपन, आपन मातृभाषा ह, ई माई के दूध बतासा ह` के द्वारा भोजपुरी भाषा की विशेषता को बताने का प्रयास किया। तत्पश्चात सुश्री अंजलि अरोड़ा खुशबू ने अपनी गजल `हम इश्क वाले इश्क से बेजार नहीं, जर्रा ए आसमां के तलबगार भी नहीं` प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी।आगे पार्वती देवी गौरा ने `अवध नगरिया से अइले वर दुलहा सुनु रे सखिया।` विवाह गीत सुनाकर श्रोताओं को द्रवित कर दिया। गोष्ठी को गति देते हुए गीतकार दयाशंकर कुशवाहा ने कवि इंद्रकुमार दीक्षित के हालिया प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह से अपने मधुर स्वर में`दास्तानें दिले राज बताये नहीं जाते,ये जख्म हर किसी को दिखाए नहीं जाते`ग़ज़ल प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। इसके बाद क्षमा श्रीवास्तव ने `छोड़ बाबुल का आंगन पराई हुई आज बिटिया की कैसी विदाई हुई` गीत के द्वारा एक बेटी की पीड़ा उकेरा। फिर प्रार्थना राय ने `वो प्यार की लौ फिर से जलानी है, बीती हुई हर बात दिल से सुनानी है।` प्रस्तुत किया। भोजपुरी गीतकार सौदागर सिंह ने `कल ना परेला धीर नाही धरे मनवा सपनवा मोरा भइले परदेशिया हो राम` लोकधुन में रचित गीत सुनाकर तालियां बटोरी ।विकास तिवारी विक्की ने बड़ी `हल्की है अब खाली है यहां पहले भाषण चलता था,अब गाली है`के माध्यम से नेताओं के आचरण में आयी गिरावट की ओर इशारा किया। गोरखपुर से आयी हुईं कवयित्री वन्दना मिश्रा ने `अपनी लेखनी से क्या लिखूं उनके बारे में, सारा जगत जानता है पहले से ही जिनके बारे में` रचना के माध्यम से गोष्ठी को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान किया । कवि योगेन्द्र पाण्डेय ने `वेदना के स्वर मुखर होते रहेंगे, क्रांति के पथ पर यूं हम चलते रहेंगे` ने लोगो के मन में जोश भरा।आगे भोजपुरी और हिन्दी के चर्चित रचनाकार डॉ सुभाष यादव ने `तुम आये हो इस पतझड़ में यौवन का मधुमास लिए, हम पनघट से लौट रहे हैं अपनी अनबूझ प्यास लिए`। गीत पढ़कर काव्य गोष्ठी को शीर्ष ऊंचाई पर पहुंचाया।
कविगोष्ठी में सरोज कुमार पाण्डेय, शिखागौड़ , प्रीति पाण्डेय,रंजिता श्रीवास्तव, प्रवीणमणि त्रिपाठी, उमेश चन्द्र तिवारी , कौशल किशोर मणि, रविनंदन सैनी, कीर्ति त्रिपाठी, भूपेन्द्र राय गंवार, श्वेता राय, रामेश्वर तिवारी राजन, अचल पुलस्तेय, रानी दुर्गावती, लालता प्रसाद चौधरी ,अमित मिश्र पहाड़ी, अंजनी कुमार उपाध्याय (बरहज,) डॉ मोहन पांडेय भ्रमर ( हाटा) आदि कवियों नेअपनी रचनाएं प्रस्तुत कर समा बांध दिया! डॉ सुधाकर तिवारी कुशीनगर ने कवियों और श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा `कविता अनुपस्थित की उपस्थिति है। इस आयोजन में उपस्थित सभी रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं पढ कर हमें अभिभूत कर दिया!` अतिथि कवि के रूप में डॉ सुभाष यादव (गोरखपुर)और भूपेन्द्र राय गंवार( कुशीनगर) को उत्तरीय तथा काव्य संग्रह `नागरी काव्य देहरी` देकर सभाध्यक्ष जयनाथ मणि त्रिपाठी मंत्री डॉ.अनिल कुमार त्रिपाठी संयोजक सरोज कुमार पाण्डेय उपाध्यक्ष इंद्र कुमार दीक्षित ने सम्मानित किया। इस मौके पर सभा द्वाराअर्धवार्षिक रूप से प्रकाशित “नागरी संदर्शिका” के सातवें अंक का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया।
इस अवसर पर ऋषिकेश मिश्र, जगदीश उपाध्याय ,गोपाल कृष्ण सिंह रामू, डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, कृष्ण गोपाल यादव, परमहंस चौरसिया, श्वेतांक मणि त्रिपाठी, रजनीश गोरे, संयुक्त मंत्री ब्रजेशपाण्डेय, ब्रजेंद्र मिश्र,न्यूज24 चैनल के अनिल कुमार पाण्डेय,
पूर्व सभासद सुभाष राय,पतहर त्रयमासिक के संपादक विभूति नारायण ओझा, डॉ. देवेंद्रनाथ तिवारी ( दिल्ली विश्वविद्यालय) अधिवक्ता सुनीता राय, आदि गणमान्य उपस्थित रहे।काव्य गोष्ठी का सुन्दर संचालन व्यंग्यकार योगेन्द्र तिवारी योगी ने किया।सभा के मंत्री डॉ अनिल कुमार त्रिपाठी ने उपस्थित कवियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कविगोष्ठी का समापन हुआ।
बंदना मिश्रा देवरिया।

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