ग़ज़ल संग्रह “कोई तो आये” पर साहित्यिक समीक्षा चर्चा में

मुरादाबाद/नई दिल्ली। वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार आदरणीय लव कुमार ‘प्रणय’ जी के ग़ज़ल संग्रह “कोई तो आये” (प्रकाशकशब्दांकुर प्रकाशन, नई दिल्ली) को लेकर साहित्यिक जगत में सकारात्मक चर्चा का माहौल है। हाल ही में इस कृति पर प्रसिद्ध साहित्यसेवी एवं साहित्यपीडिया की संस्थापक डॉ. अर्चना गुप्ता ने अपनी विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने इस ग़ज़ल संग्रह को मानवीय संवेदनाओं की सजीव यात्रा बताया। डॉ. गुप्ता के अनुसार, संग्रह का शीर्षक “कोई तो आये” ही पाठक को आकर्षित करता है और एक निर्मल, संवेदनशील मन की प्रतीक्षा व पीड़ा को अभिव्यक्त करता है। पुस्तक की ग़ज़लें जीवन के विविध रंगों—दर्द, प्रेम, संघर्ष, सामाजिक चेतना और आशा को समेटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि कवि की लेखनी में दर्द की गहराई स्पष्ट झलकती है, जहाँ ज़ख़्मों की टीस भी है और संबल की तलाश भी। समाज और समय के बदलते व्यवहार पर कवि की पैनी दृष्टि को रेखांकित करते हुए डॉ. गुप्ता ने कहा कि ग़ज़लों में ज़माने की गिरगिटी प्रवृत्तियों पर सशक्त प्रहार दिखाई देता है। वहीं, सुदृढ़ समाज के निर्माण हेतु प्रेम, नेह और मानवीय मूल्यों के दीप जलाने का संदेश भी कवि बख़ूबी देता है। उन्होंने यह भी कहा कि संग्रह की भाषा सरल, सहज और आम बोलचाल की हिन्दी है, जो पाठक को सीधे जोड़ती है। प्रेम की कोमल अनुभूतियों से लेकर जीवन-संघर्ष की दृढ़ता तक, हर ग़ज़ल पाठक को एक संपूर्ण जीवन-यात्रा का अनुभव कराती है। अपनी समीक्षा के अंत में डॉ. अर्चना गुप्ता ने कहा कोई तो आये’ सिर्फ़ प्रतीक्षा नहीं, बल्कि एक ऐसी यात्रा है जिसके साथ चलते हुए पाठक सुकून महसूस करता है। उन्होंने आदरणीय लव कुमार ‘प्रणय’ जी को इस कृति के लिए हार्दिक बधाई देते हुए विश्वास जताया कि यह ग़ज़ल संग्रह साहित्यिक समाज में अपना विशिष्ट स्थान बनाएगा और पाठकों का भरपूर स्नेह प्राप्त करेगा।
*पुस्तक समीक्षिका डॉ अर्चना गुप्ता*



