वर्ष 2025 की यादें — राजेश कुमार राज

वर्ष 2023 में मेरे शरीर में कैंसर के संक्रमण का पता चलने और उसके यथोचित उपचार के पश्चात मुझे ऐसा महसूस होता है कि जैसे गुज़रते हर दिन के साथ मुझे रोज़ जीवन दान मिल रहा है। जीवन के 66 वसंत देख चुका हूॅं और संतुष्ट भी हूॅं। इसलिए जीने-मरने के विषय में ज्यादा चिंता न करते हुए वर्ष 2024 के पूर्वार्द्ध में मैंने अपने दिल के किसी कौने में दबे कवि और लेखक को नींद से जगाया। मुख्यतः काव्य लेखन की ओर अग्रसर हुआ। कदाचित राज श्री साहित्य अकादमी के फेसबुक मंच पर आदरणीया शिखा खुराना जी से परिचय हुआ। उन्होंने वर्ष 2024 में साझा काव्य संग्रह ‘अटल काव्यांजलि-2024’ में प्रकाशन हेतु पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी के व्यक्तित्व पर कविता लिखने के लिए प्रेरित किया। खैर, कविता लिखी भी गई और आदरणीया शिखा खुराना जी के सौजन्य से साझा काव्य संग्रह में छप भी गई। इसी क्रम में आयोजक संस्था प्रेरणा दर्पण साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच तथा साहित्य24 के संरक्षक आदरणीय डाक्टर चन्द्र मोहन भगत और संस्थापक आदरणीय हरिप्रकाश पाण्डेय के व्यक्तिगत सम्पर्क में आने का अवसर मिला। इस सुखद अनुभूति ने मुझे अप्रतिम ऊर्जा से भर दिया और मैं काव्य सर्जन के कार्य में दुगनी शक्ति के साथ जुट गया।वर्ष 2025 में आदरणीया शिखा खुराना द्वारा सम्पादित साझा काव्य संग्रह ‘हॅंसगुल्ले’ में पुनः मेरी एक कविता को न केवल स्थान मिला अपितु ‘हॅंसगुल्ले’ के विमोचन कार्यक्रम में मुझे मंच से पहली बार काव्य पाठ करने का अवसर भी प्राप्त हुआ। वर्ष 2025 में मेरी काव्य यात्रा गति पकड़ चुकी थी। आदरणीया शिखा खुराना और आदरणीया सुनीला नारंग के साथ के कारण वर्ष 2025 में अब तक आठ साझा काव्य संग्रहों, जिनका प्रकाशन और विमोचन प्रेरणा दर्पण साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच तथा साहित्य24 द्वारा किया गया, में मेरी कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं। प्रेरणा दर्पण के कार्यक्रमों में शिरक़त के दौरान आदरणीया कुलदीप कौर ‘दीप’ जी से परिचय और उनके फेसबुक समूह ‘सुवासितम्’ से जुड़ना हुआ। आदरणीया कुलदीप कौर के सौजन्य से मुझे कई मंचों, जैसे सुवासितम् फेसबुक पटल, ‘वनकाम’ और ‘मैजिक मैन एन चंद्रा’ यूट्यूब चैनल, पर काव्य पाठ करने का अवसर प्राप्त हुआ। वर्ष 2025 के उत्तरार्द्ध में मैं ‘भावों का दर्पण’ फेसबुक समूह से जुड़ा। ‘भावों का दर्पण’ के संस्थापक आदरणीय ललित सक्सेना ‘राही’ द्वारा की गई मेरी कविताओं की अद्वितीय समीक्षा ने मुझे लिखने की नव प्रेरणा प्रदान की। गत वर्ष ही मुझे आदरणीय श्री जे पी शर्मा, सम्पादक, नज़र इण्डिया 24-जयपुर के सम्पर्क में आने का सुअवसर मिला। वह अपने उपरोक्त डिजिटल समाचारपत्र में नवोदित रचनाकारों की रचनाओं को प्रकाशित कर उन्हें पहचान और सम्मान प्रदान करने का कार्य निरन्तर कर रहे हैं। उनके सहयोग से मुझे भी हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में पहचान मिली है। कुल मिला कर मेरे लगभग दो वर्षों के कवि-जीवन में वर्ष 2025 उपलब्धियों भरा रहा। मैं काव्य सर्जन में इतना व्यस्त रहा कि अपनी कैंसर की बीमारी की भयावहता और उसके क्रूर परिणाम की तरफ ऑंख उठा कर देखने तक का भी अवसर नहीं मिला।
******




