होली का पर्व — महेन्द्र कुमार सिन्हा जय

होली का पर्व हमारे हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है। होली रंगों का त्यौहार है। होली पर्व मनाने से जुड़ी एक बड़ी महत्वपूर्ण प्राचीन कहानी है। धरती पर हिरण्यकश्यप नाम के राक्षस का जन्म हुआ था।वह बहुत शक्तिशाली और क्रूर था। अपनी प्रजा को बहुत सताता था।तप कर ब्रह्मा जी से किसी नर नारायण जीव से न रात में ना दिन में , मरने का वरदान प्राप्त किया था।इसी अभिमान में वो अपनी प्रजा से अपनी पूजा करने को कहते थे। भक्त और ब्राह्मण को बहुत बताते थे।पर उसकी पत्नी कयाधु हरि भक्त थी।उसी के संस्कार स्वरुप उनके बेटे प्रह्लाद ने भी हरि नारायण भगवान विष्णु का ध्यान पूजा जाप करने लग गए।इस आचरण के कारण उनके पिता उनसे बहुत रूष्ट रहते थे। प्रह्लाद को जान से मरवाने की बहुत कोशिश किया था।पर हरि कृपा से भक्त प्रह्लाद बच जाते थे।इसी क्रम में अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को जलाने को कह दिया। होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था।
होलिका प्रह्लाद को गोदी में बैठाकर लकड़ी की ढेर में आग लगा दिया गया। हरि नारायण भगवान की ईच्छा से होलिका जल गई और भक्त प्रह्लाद बच गए। इसी की याद में फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है। तथा भक्त प्रह्लाद के बच जानें की खुशी आनंद में रंगों का त्यौहार होली पर्व मनाया जाता है।
भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए नारायण भगवान नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप को मार डाला,और भक्त प्रह्लाद को अपने गोदी में बैठाकर बहुत स्नेह किया।
होली का पर्व बहुत ही खुशी और आनंद भक्त का पर्व है।हमें इसे बड़े प्रेम और सौहार्दपूर्ण वातावरण मनाना चाहिए।
महेन्द्र कुमार सिन्हा जय
महासमुंद छत्तीसगढ़



