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सच्चा धन — कविता साव पश्चिम बंगाल

एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक बालक रहता था। वह बहुत होशियार था, लेकिन उसे एक बुरी आदत थी,वह हर चीज़ में शॉर्टकट ढूँढता था। पढ़ाई हो या काम, वह मेहनत से बचने की कोशिश करता था।
एक दिन उसके गुरुजी ने कक्षा में कहा, “जो सबसे पहले इस प्रश्न का सही उत्तर देगा, उसे पुरस्कार मिलेगा।” अर्जुन ने जल्दी से किसी और की कॉपी देखकर उत्तर लिख दिया और सबसे पहले जाकर दे दिया। उसे पुरस्कार भी मिल गया।
लेकिन कुछ दिनों बाद परीक्षा हुई। इस बार नकल का मौका नहीं था। अर्जुन ने जैसे-तैसे उत्तर लिखे, पर परिणाम आया तो वह असफल हो गया। वह बहुत दुखी हुआ।
गुरुजी ने उसे बुलाकर समझाया, “अर्जुन, जो ज्ञान तुमने नकल से पाया, वह तुम्हारा अपना नहीं था। असली धन मेहनत और ईमानदारी से मिलता है। शॉर्टकट से सफलता मिल भी जाए, तो टिकती नहीं।”
अर्जुन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने ठान लिया कि अब वह मेहनत और ईमानदारी से पढ़ाई करेगा। धीरे-धीरे उसकी आदत बदल गई और वह सच में एक होनहार छात्र बन गया।
शिक्षा:
मेहनत और ईमानदारी ही सच्चा धन है, शॉर्टकट से मिली सफलता स्थायी नहीं होती।
कविता साव
पश्चिम बंगाल

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