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लघु कथा- मन मस्त : रोग मुक्त — महेश तंवर सोहन पुरा नीमकाथाना (राजस्थान)

डाक विभाग में सेवारत राधा मणी को गिटार बजाने और संगीत गाने की एक अच्छी आदत बनी हुई थी। वह सदैव सुबह और शाम गिटार के साथ हरि का भजन किया करती थी। राधा मणी के दो लड़के और एक लड़की थी। पति शिक्षा विभाग में कार्यरत थे। राधा मणी का पूरा परिवार सुकून के साथ जीवन जी रहा था। राधा मणी के मधुर स्वभाव ने डाक विभाग के सभी कर्मचारियों के मन को मोह रखा था। उनमें से हरिशंकर जी राधा मणी के साथ कई दफा गिटार के साथ भजन कीर्तन करने का शुभ अवसर ले चुका था। ऐसे में हरिशंकर जी का राधा मणी के साथ विशेष मधुर संबंध हो गए थे।
जीवन की रफ्तार में राधा मणी रोग ग्रस्त हो गई थी। चिकित्सा जांच करवाने पर ज्ञात हुआ कि राधा मणी को कैंसर हो गया। डॉक्टर ने सलाह दी कि राधा मणी के साथ खाना- पीना -सोना व बातचीत करने में दूरी बनाए रखें । वरना उसके बैक्टीरिया आपको भी बीमार कर देंगे। यह सुनकर परिवार के सभी लोग धीरे-धीरे दूरी बनाने लग गए। राधा मणी की हालत कुछ ज्यादा ही बिगड़ने लगी। डाक विभाग भी छूट गया। उसे घर पर ही एक बंद कमरे में रहने को मजबूर कर दिया गया। ऑक्सीजन व आहार की नल को नाक व मुंह पर लगा रखी थी। अतः अब उसका बोल पाना भी मुश्किल में था। राधा मणी जीवन -मृत्यु के बीच में जूझ रही थी। रिश्तेदार भी दूर से ही हाय-बाय करके चल देते थे ।
एक दिन हरिशंकर जी को भान आया कि क्यों न आज राधा मणी जी से मिलने चले। हरिशंकर जी, राधा मणी जी के घर पर आए। देख कर बच्चे व राधा मणी का पति महादेव जी हरिशंकर जी का अभिवादन किया। हरिशंकर जी ने कहा कि मुझे राधा मणी जी से मिलना है। महादेव जी ने हाथ का इशारा करके बताए कि इस कमरे में है । आप मत जाओ। उनको कैंसर की बीमारी है। डॉक्टर ने मना कर रखा है। हरिशंकर जी नहीं रुके और सीधे राधा मणी के पास जाकर राधे-राधे बोले। राधा मणि की आंखों में खुशी की चमक थी। वह हरि शंकर जी का हाथ पकड़ कर रोने लगी । राधा मणी हरिशंकर जी से ऑक्सीजन व आहार की नलकी नाक से हटाने के लिए आग्रह करने लगी। हरिशंकर जी ने गिटार की ओर संकेत करके कहा कि आपको गिटार पसंद है न। राधा मणि ने हां में गर्दन हिलाई। यह देख हरि शंकर जी प्रभु का स्मरण कर के ऑक्सीजन की नलकी हटा दी और लगभग ढाई घंटे तक लगातार गिटार बजाकर हरि भजन किया। अब धीरे-धीरे राधा मणी के स्वास्थ्य में सुधार आने लगा। वह पीछे-पीछे भजन के कोई -कोई शब्द बोलने लगी । अब हरिशंकर जी को और भी खुशी हो गई । वह रोज राधा मनी के पास आने लगा और 2 घंटे तक गिटार के साथ हरि भजन करने लगा। राधा मणी धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगी। 15 दिन बाद राधा मणी को चिकित्सालय में जांच कराने के लिए लेकर गया। जांच में अब कैंसर नाम की कोई बीमारी नहीं थी। राधा मणी ने अपने पूरे परिवार को त्याग कर अपना अलग से कमरा किराए पर ले लिया और पुनः डाक विभाग में कार्य करने लग गई। राधा मणी ने परिवार वालों व रिश्तेदारों से यह कह कर अलग हो गई कि मैं आपकी ओर से कभी कि मर चुकी थी । अब मेरा जो भी कुछ है, वह हरिशंकर जी हैं। इसके सिवा इस संसार में कोई नहीं है।

महेश तंवर सोहन पुरा
नीमकाथाना (राजस्थान)

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