मेरी जापान यात्रा: एक अविस्मरणीय संस्मरण’ — डॉ.दक्षा जोशी’ निर्झरा’ अहमदाबाद, गुजरात।
जापान की मेरी यात्रा केवल भ्रमण नहीं, बल्कि आधुनिकता और परंपरा के अद्भुत संगम का अनुभव थी। जैसे ही मैं टोक्यो उतरी, वहाँ की सुव्यवस्थित जीवनशैली और तक़नीक ने मुझे चकित कर दिया। शिन्कान्सेन (बुलेट ट्रेन) की गति और समय की पाबंदी जापानी अनुशासन का जीवंत प्रमाण थी।
यात्रा का सबसे मर्मस्पर्शी पहलू वहाँ के लोगों का व्यवहार था। क्योटो के प्राचीन मंदिरों में घूमते हुए मैंने महसूस किया कि जापानी लोग अपनी विरासत को कितनी सहजता से सहेज कर रखते हैं। ‘साकुरा’ (चेरी ब्लॉसम) के खिले फूलों के बीच बैठकर प्रकृति से जुड़ाव का जो अनुभव मिला। वहाँ की स्वच्छता और अजनबियों के प्रति सम्मान की भावना (ओमोतेनाशी) ने मेरे हृदय को छू लिया। फौजी पर्वत (Mount Fuji) की शांत भव्यता और सूर्यास्त के समय क्षितिज का वह दृश्य आज भी मेरी आँखों में बसा है। यह यात्रा मुझे सिखा गई कि विकास की अंधी दौड़ में अपनी जड़ों और शालीनता को कभी नहीं भूलना चाहिए।
-डॉ.दक्षा जोशी’ निर्झरा’
अहमदाबाद, गुजरात।




